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Saturday, April 20, 2019

JEE Advance/जेईई एडवांस क्या है? सम्पूर्ण जानकारी।

दोस्तो नमस्कार, जैसा कि मैं आपको अपने पिछले आर्टिकल/पोस्ट में JEE Main के बारे में पूरी जानकारी दे चुका हूँ। अगर आपने हमारी वो पोस्ट नहीं पढ़ी तो आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पूरी जानकारी पढ़ सकते हैं।
JEE Main पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

एक बार फिर से में आपको बतादूँ की JEE Advance भी JEE Main की तरह Engineering की पढ़ाई के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा है, यानी Engeneering में दाखिला लेने के लिए ली जाने वाली एक Entrance Exam हैं। इन दोनों परीक्षाओं Advance और Main में बहुत ही अंतर होता हैं। इसमें ज्यादातर वही छात्र सम्मिलित होते हैं जिन्होंने JEE Main पास कर रखा हो। इसमे JEE Main पास करने वाले top डेढ़ लाख छात्र शामिल होते हैं। इस परीक्षा यानी JEE Advance में सफल छात्रों को ही आईआईटी जैसे Institute में दाखिला मिलता हैं।


JEE/Joint Entrance Examination

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JEE Advance परीक्षा कौन दे सकता हैं?
  • वो सभी स्टूडेंट जिन्होंने 12वीं (पीसीएम/फिजिक्स,केमेस्ट्री, मैथ)में कम से कम 75% अंक प्राप्त कर रखे हो। इसमे सामान्य वर्ग और ओबिसी वर्ग के लिए न्यूनतम अंक 75%, ओर ST, SC PWD 65% अंक होना अनिवार्य है।
  • इसमे वो अभ्यर्थी भी शामिल हो सकते हैं जिसकी JEE Main के रिज़ल्ट में rank क़रीब 2 लाख के अंदर आयी हो।
  • इस परीक्षा के लिए अभ्यर्थी की उम्र 25 साल से अधिक न हो।
  • कोई भी अभ्यर्थी/छात्र अधिकतम 2 बार ही JEE Advance परीक्षा दे सकता हैं।
यह परीक्षा देश की कुछ सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक हैं। इस परीक्षा को पास करने के लिए आपको काफ़ी मेहनत एवं लगन की ज़रूरत होती हैं। आप की सटीक योजना, कड़ी मेहनत ओर सही मार्गदर्शन इस परीक्षा को पास करने के सबसे बड़े हथियार हैं।

JEE Advance पास करने से कहाँ मिलेगा दाखिला?JEE Advance IIT/Indian Institute of Technology यानी भारतीय प्रोधोगिकी संस्थान में आपको दाखिला/प्रवेश मिल जाता है। IIT के अलावा और भी बहुत सारे बड़े कॉलेज हैं जहाँ JEE Advance परीक्षा पास के आधार पर ही प्रवेश मिलता हैं। इनमें से कुछ कॉलेज के नाम नीचे दे रहा हूँ :
  • Rajiv Gandhi Institute of Petroleum Technology (RGIPT), Rae Barele
  • Indian Institutes of Science Education and Research (IISER), तिरुआनंतपुरम, भोपाल, मोहाली, कोलकाता, पुणे। 
  • Indian Institute of Space Science and Technology (IIST), तिरुआनंतपुरम।
JEE Advance का पेपर पैटर्न कैसे होता हैं?
JEE Advance के परीक्षा पैटर्न को लेकर JEE की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी जाती है। इसमे अंतिम समय तक इस बात का खुलासा नहीं किया जाता है कि परीक्षा में किस तरह के और कितने अंकों के सवाल पूछे जाएंगे, लेकिन फिर भी पिछली परीक्षाओं के आधार पर हम आपको बता रहे हैं। 
  • यह परीक्षा भी Online माध्यम से ली जाती है।
  • इस परीक्षा में सभी प्रश्न Objective Type के होते हैं।
  • इस परीक्षा में भी Negative Marking होती हैं।
  • यह परीक्षा दो स्तर में होती हैं, इसमे प्रत्येक Paper में Physics, Chemistry, Maths के प्रश्न होते हैं।

JEE Advance के लिए आवेदन कैसे करें?
JEE main का result आने के बाद आप ऑनलाइन माध्यम से JEE Advance के लिए अपना फॉर्म apply कर सकते हैं।

हमारे और आर्टिकल पढ़ने के लिए मोबाइल में हमारी पोस्ट ओपन करने के बाद सबसे निचे View Web Version पर क्लीक करें, ताकि आप हमारे बाकि की पोस्ट भी पढ़ सकें।
दोस्तों अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकरी अच्छी लगी तो, इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक Share करे तथा इस आर्टिकल संबंधी अगर किसी का कोई भी सुझाव या सवाल है तो वो हमें जरूर लिखें।




JEE main/जेईई मैन क्या है? सम्पूर्ण जानकारी। Joint Entrance Examination

दोस्तो नमस्कार, हमारे वेब पोर्टल पर आपका बहुत स्वागत है। आप हमारे इस पोर्टल पर Technology ओर Education से संबंधित आर्टिकल पढ़ सकते हैं, इन आर्टिकल में आप किसी भी विषय की संपूर्ण जानकारी पा सकते हैं। आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि JEE Main क्या होता है। इसके आर्टिकल के माध्यम से हमारा प्रयास रहेगा कि हम आपको आपके सपने को पूरा करने में मदद करें। आज हम यहाँ पर संयुक्त प्रवेश परीक्षा/JEE/Joint Entrance Examination के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। कृपया पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें।
JEE/Joint Entrance Examination



आजकल हर नवयुवक एक अच्छे पेशे की तलाश में रहता है। या वो नवयुवक जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं और अच्छा भविष्य बनाना चाहते हैं। अगर आप भी चाहते है की आप भी  Engineer बने, या आपका सपना भी है इस फील्ड में कैरियर बनाने का तो आपके लिए जरुरी हैं कि आपको सही समय पर सही जानकारी मिले। अगर आपको सही समय पर सही जानकारी मिलेगी तो निश्चित ही आपका भविष्य सुनहरा होगा।
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दोस्तो आपने कहीं न कहीं जरूर पढ़ा या सुना होगा कि Engineer/अभियंता बनने के लिए BE/Bachelor of Engineering या फिर B.Tec/Bachelor of Technology करना होता हैं। इनमे से कोई भी कोर्स करने के लिए इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा/Engineering Entrance Exam देना होता है। इस एग्जाम को पास करने के बाद ही आपको किसी Engineering College में दाखिल मिलता हैं। आज जिस JEE test की हम बात कर रहे हैं वो एक राष्ट्रीय स्तर/National level की Entrance Exam हैं।

यहां में आपको बतादूँ की Engineering में दाखिला लेने के लिए वैसे तो राज्य स्तर/State level पर कई परीक्षाएं होती हैं, किन्तु National Level पर ली जाने वाले परीक्षाओं में से JEE/Joint Entrance Examination हैं। JEE Main किसी भी Engineering College में दाखिल लेने के लिए ली जाने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा/Joint Entrance Examination हैं, जो की CBSE /AICTE/IIT(यह परीक्षा आगामी सत्र से NTA/National Testing Agency द्वारा भी ली जा सकती है।)द्वारा एक साल में 2 बार आयोजित की जाती हैं। यह परीक्षा जनवरी ओर अप्रैल के महीने में ली जाती है।


कुछ समय पहले JEE को 2 भागों में बाँट दिया गया। पहला है JEE Main ओर दूसरा है JEE Advance. आज की इस पोस्ट में हम सिर्फ JEE Main के बारे में ही बात करेंगे, ओर हम अपनी अगली पोस्ट में JEE Advance के बारे में आपको जानकारी देंगे।
यहां पढ़ें JEE Advance क्या होता है?

JEE Main test कौन दे सकता हैं?
  • अगर आपने11वीं ओर12वीं PCM यानी Physics, chemistry, Maths से पास की हो।
  • आप अगर उपरोक्त विषयों के साथ 12वीं क्लास में पढ़ रहे हैं तो भी आप ये परीक्षा दे सकते हैं।

JEE Mains करने के लिए कहाँ मिलेगा दाखिला?
दोस्तो अगर आप इस exam में काफी अच्छा score कर लेते हैं तो आपको NIT, IIIT जैसे बहुप्रतिष्ठित college में दाखिला/Admission मिल सकता हैं। इसके अलावा अगर आप कम score प्राप्त करते हैं तो भी आपको चिंता करने की जरूरत नही, इनके अलावा आपको किसी दूसरे अच्छे Engineering College में प्रवेश मिल जाएगा। कहने का मतलब ये हैं की आपका score जितना बेहतर होगा आपको उतने ही अच्छे स्तर के कॉलेज में दाखिला मिल जाएगा।


नोट: अगर आप IIT में प्रवेश पाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको JEE Advance में सफल होना होगा

JEE Main पेपर का पैटर्न कैसा होता हैं?
यहां में आपको बतादूँ की JEE Main की परीक्षा online होती हैं।
  • इस परीक्षा/exam में कुल 90 प्रश्न होते हैं। प्रत्येक विषय "Physics/फिजिक्स, Chemastry/केमिस्ट्री, Meth/मैथ" के 30-30 प्रश्न हल करने होते हैं।
  • इस परीक्षा में कुल 360 अंको के प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • इसमे सभी प्रश्न Objective Type के होते है, एक प्रश्न के 4 विकल्प में से एक सही विकल्प select करना होता है।
  • इस परीक्षा में Negative marking भी होती है, इसमे प्रत्येक गलत उत्तर का 1/4 अंक काटा जाता हैं।
  • JEE Mains परीक्षा आप कितनी बार दे सकते हैं?
  • जब आप 12वीं कक्षा में पढ़ रहे होते हैं, तब से लेकर अगले 3 सालों तक आप JEE Main की परीक्षा दे सकते हैं। एक साल में यह परीक्षा 2 बार ली जाती है, इस हिसाब से आप अधिकतम 6 बार ये परीक्षा दे सकते हैं।


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Saturday, April 13, 2019

पीएचडी/PhD. क्या है? पीएचडी करने के लिए योग्यता। PHD

दोस्तो नमस्कार हमारे वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है, हम अपने इस वेब पोर्टल पर Technology ओर Education से संबंधित आर्टिकल लिखते है। आज के इस लेख में हम आपके लिए लेकर आये हैं पीएचडी से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी, अगर आप भी करना चाहते हैं पीएचडी तो पोस्ट आपके बहुत काम की है। कृपया इसे पूरा पढ़ें, साथ ही अन्य जानकारी के लिए आप हमारी दूसरी पोस्ट भी पढ़ सकते हैं।

पीएचडी/PhD यानी डॉक्टर ऑफ़ फिलोसोफी/Doctor of Philosophy जिसे हम शोर्ट और सामान्यतः Ph.D या फिर PhD भी कहते है। पीएचडी भारतीय शिक्षा प्रणाली का एक उच्च स्तर का डिग्री कोर्स है जो की पुरे 3 साल का होता है (इसका मुख्य कोर्स टाइम 3 साल होता है तथा 6 साल के अंदर तक आप अपने थीसिस जमा करवा सकते हैं)। इस कोर्स को पूरा करने के बाद अर्थात पीएचडी की डिग्री पूरी करने के बाद आपके नाम के आगे डॉo/Dr. लग जाता है। पीएचडी एक डॉक्टरेट डिग्री/Doctorate Degree है। अगर आपको किसी भी बड़े कॉलेज में प्रोफेसर या लेक्चरर बनना है, तो ऐसे में आपके पास ये डिग्री होनी ही चाहिए तभी आप एक प्रोफेसर बन सकते है। ऐसा जरूरी नही है कि आप प्रोफेसर या लेक्चरर बने, आप चाहे तो किसी विषय पर रिसर्च या फिर एनालिसिस भी कर सकते है। किसी भी विषय से पीएचडी करने के लिए आपके पास उस विषय का बहुत ही अनुभव होना चाहिए। उस विषय से इस कोर्स को करने के बाद आपके पास उस विषय का ओर ज्यादा ज्ञान होगा। यानि आप उस विषय के एक्सपर्ट कहलायेंगे। पीएचडी आप तभी कर सकते हैं जब आपने किसी भी विषय से मास्टर डिग्री/Post graduation degree (MA. M.Phil.) पूरी कर रखी हो।

कुछ ध्यान देने योग्य बातें। 
पीएचडी कोर्स करने से पहले आपको ये बाते ध्यान में रखनी होगी कि जिस भी विषय में आपको इंटरेस्ट हो या जिस विषय मे आप माहिर हों, या जिस भी विषय में आपने 12वीं पास की है। उसी विषय में ग्रेजुएशन पूरी करे साथ ही मास्टर डिग्री भी उसी विषय में पूरी करे। अगर आप एक ही विषय को लगातार पढ़ेंगे तो वो विषय आपके लिए पीएचडी करने के लिए बहुत फायदेमंद रहेगा। मान लीजिए आपने 12वीं हिंदी-इंग्लिश के साथ संस्कृत और भूगोल से की है, तो आपको ग्रेजुएशन/बीए भी संस्कृत और भूगोल विषयों में करनी चाहिए, उसके बाद आपको मास्टर डिग्री में संस्कृत या भूगोल इन दोनों विषयों में से एक विषय का चुनाव करना होगा, या आप चाहें तो दोनों विषयों से भी मास्टर डिग्री कर सकते हैं।

पीएचडी लिए योग्यता क्या चाहिए /Eligibility Criteria for Ph.D. Course
इसके लिए आपने कोई भी मास्टर डिग्री (MA. M.Phil.) पूरी की होनी चाहिए।
मास्टर डिग्री में आपके कम से कम 55% या 60% नंबर होने चाहिए।
पीएचडी एंट्रेंस एग्जाम के लिए नंबर परसेंटेज अलग-अलग विश्वविधालयों में अलग-अलग होती है।
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पीएचडी कोर्स करने के फायदे /Advantage of Ph.D. Course
  • पीएचडी करने के बाद आप अपने फील्ड में एक्सपर्ट कहलायेंगे।
  • पीएचडी भारतीय शिक्षा प्रणाली की सबसे उच्च डिग्री है।
  • पीएचडी करने के बाद आप किसी भी कॉलेज में जिस विषय से आपने पीएचडी की है उस विषय के प्रोफेसर बन सकते हैं।
  • पीएचडी करने के बाद आप किसी विषय पर रिसर्च या एनालिसिस भी कर सकते हैं।
  • पीएचडी करने के बाद आप अपने नाम के आगे डॉo/Dr. लगा सकते हैं।
  • पीएचडी करने के बाद किसी भी पोजीशन के लिए जॉब में अप्लाई कर सकते हैं।
  • पीएचडी करने के बाद आप क्रिएटर ऑफ़ इनफार्मेशन भी बन जाते हैं।
  • पीएचडी करने के बाद आप उस विषय के सर्वज्ञाता बन जाते हैं। आपको उस विषय में सब कुछ ज्ञान हो जायेगा की क्या सही है और क्या गलत है।



पीएचडी/Ph.D. सम्पूर्ण जानकारी। शैक्षणिक योग्यता। 

12वीं पूरी करें। 
देखिये 10वीं कक्षा तक आप किसी भी विषय का चुनाव खुद नहीं कर सकते, 11वीं और 12वीं में आप स्वतंत्र विषयों का चुनाव कर सकते हैं, इसलिए पीएचडी के लिए 11वीं और 12वीं को ही पहला कदम माना जाता है। अब जिस भी विषय में आपकी रुची है उसी सब्जेक्ट को चुने।  किसी भी विषय पर फोकस करें जिसमे आपकी रूचि ज्यादा हो ताकि आपको आगे जाके फायदा हो, और कोशिश करें की 12वी आप अच्छे नंबर से पास करे और कम से कम 60% या इससे अधिक नंबर लाएं। 

ग्रेजुएशन पूरी करे। 
जैसे ही आपकी 12वीं कक्षा पास हो आप आगे की पढाई/ग्रेजुएशन/Bachelor Level के लिए किसी अच्छे कॉलेज में अप्लाई करें। आप ग्रेजुएशन रेगुलर करें तो सबसे बेस्ट रहेगा। ग्रेजुएशन में भी आपको अपने पसंदीदा विषय पर विशेष ध्यान देना होगा। 3 साल ग्रेजुएशन डिग्री की पढाई पूरी करें। इसमें आपको जिस भी फील्ड में एक्सपर्ट बनना है उस विषय को अच्छे से पढ़े और ज्यादा से ज्यादा नंबर लाएं। 


पोस्ट ग्रेजुएशन/मास्टर डिग्री पूरी करे। 
जैसे ही आपकी ग्रेजुएशन पास हो आप आगे की पढाई/पोस्ट ग्रेजुएशन/Master Level के लिए किसी अच्छे कॉलेज/विश्विधालय में अप्लाई करें। इसमें ध्यान रहे की जिस विषय में आपने बैचलर/ग्रेजुएशन डिग्री/Bachelor Degree पूरी की है, उसी विषय में मास्टर डिग्री/Master Degree भी पूरी करें। इसके बाद ही आपको PhD में ज्यादा फायदा होगा। साथ ही ये भी कोशिश करें की मास्टर और बैचलर डिग्री में आपके कम से कम 60% नंबर हो ताकि आपको आगे PhD एंट्रेंस एग्जाम के लिए कोई दिक्कत न हो। 

UGC NET के लिए अप्लाई कर टेस्ट और क्लियर करें। 
आपकी पोस्ट ग्रेजुएशन पूरी हो जाने के बाद आपको PhD के लिए UGC NET को क्लियर करना होगा। कुछ साल पहले तक PhD के लिए ये टेस्ट देना अनिवार्य नहीं था। लेकिन अब PhD करने के लिए इस टेस्ट को क्लियर करना अनिवार्य कर दिया गया है। 
UGC (University Grant Commission)
NET  (National Eligibility Test)

PhD एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करें और पढ़ें। 
जैसे ही आपका NET/National Eligibility Test क्लियर हो जाये, इसके बाद आप पीएचडी की पढाई के लिए अपने लिए उप युक्त कॉलेज/विश्विधालय चुन सकते हैं। इसके लिए आपको उस विश्विधालय के एंट्रेंस एग्जाम को पास करना होगा। हर विश्विधालय/यूनिवर्सिटी/University पीएचडी एंट्रेंस एग्जाम कंडक्ट करती है। पीएचडी के लिए तो आपको इस एग्जाम को भी क्लियर करना होगा, तभी आपको पीएचडी में एडमिशन मिलेगा। 


PhD के लिए फीस। 
दोस्तों पीएचडी के लिए कोई तय फीस नहीं है, अलग-अलग कॉलेज/विश्विधालय में अलग-अलग Fee Structure होता है। अगर आप किसी सरकारी कॉलेज/विश्विधालय से ये कोर्स करते हैं तो आपकी फीस बहुत कम लगती है, अगर आप किसी प्राइवेट कॉलेज/विश्विधालय से पीएचडी करते हैं तो आपको ज्यादा फीस देनी होगी। 
हमारे और आर्टिकल पढ़ने के लिए मोबाइल में हमारी पोस्ट ओपन करने के बाद सबसे निचे View Web Version पर क्लीक करें, ताकि आप हमारे बाकि की पोस्ट भी पढ़ सकें।
दोस्तों अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकरी अच्छी लगी तो, इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक Share करे तथा इस आर्टिकल संबंधी अगर किसी का कोई भी सुझाव या सवाल है तो वो हमें जरूर लिखें।





Wednesday, April 10, 2019

EVM/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन क्या है? जानिए इसका इतिहास सम्पूर्ण जानकारी के साथ। What is EVM/Electronic Voting Machine.

दोस्तों नमस्कार हमारा देश लोकतान्त्रिक देश है यहाँ हर साल कोई न कोई इलेक्शन चलता ही रहता है, इसी इलेक्शन की वोटिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ईवीएम/EVM/Electronic Voting Machine का आजकल लगभग सभी इलेक्शन में प्रयोग किया जाता है। जहाँ एक तरफ इस मशीन के आने के बाद वोटिंग के लिए प्रयोग में आने वाले कागज के मतपत्र का प्रयोग लगभग शून्य हो गया है वहीँ साथ ही वोटिंग प्रक्रिया भी सहज हो गई है। अब तक तो आप सकझ गए होंगे ही की आज का हमारा विषय है ईवीएम/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन। आगे हम इसी के बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं कृपया लेख को पूरा पढ़ें।
What is EVM/Electronic Voting Machine.

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इतिहास। 
आगे बढ़ने से पहले जान लेते हैं ईवीएम का इतिहास। EVM/Electronic Voting Machine का आविष्कार साल 1980 में "M.B.Hanifa" के द्वारा किया गया था। इस मशीन को उन्होंने "इलेक्ट्रॉनिक संचालित मतगणना मशीन" के नाम से 15 अक्तूबर 1980 को पंजीकृत/Registered करवाया था। एकल सर्किट का उपयोग कर "M.B.Hanifa" द्वारा बनाये गये डिजाइन को भारत के तमिलनाडु राज्य के 6 शहरों में आयोजित सरकारी प्रदर्शनियों में जनता के लिए प्रदर्शनी हेतु इसे रखा गया था।
What is EVM?
Election Commission of India/भारत निर्वाचन आयोग द्वारा साल 1989 में "Electronics Corporation of India Limited/इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड" के सहयोग से भारत में EVM/ईवीएम बनाने की शुरूआत की गई थी। EVM/ईवीएम के औद्योगिक डिजाइनर आईआईटी बॉम्बे/IIT Bombay के संकाय सदस्य/Faculty Members थे।

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ईवीएम/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की संरचना और तकनीक। 
किसी भी ईवीएम में दो भाग होते हैं - नियंत्रण इकाई/Control Unit और मतदान इकाई/Voting Unit। ईवीएम के दोनों भाग एक पांच मीटर लंबे तार से जुड़े होते हैं। नियंत्रण इकाई/Control Unit नियुक्त किये गए अधिकारी" यानि "मतदान अधिकारी" के पास रहता है। जबकि मतदान इकाई/Voting Unit को मतदान कक्ष के अंदर रखा जाता है। मतदाता को मत-पत्र जारी करने के बजाय नियंत्रण इकाई/Control Unit के पास बैठा अधिकारी मतदान बटन/Ballot Button को दबाता है। इसके बाद मतदाता मतदान इकाई/Voting Unit पर अपने पसन्द के किसी भी उम्मीदवार के नाम और चुनाव चिह्न के सामने बने नीले बटन को दबाकर मतदान करता है। चूँकि यह इलेक्ट्रॉनिक मशीन है इसलिए इसे चलने के लिए बिजली की भी जरूरत होती है, इसलिए ईवीएम में 6 वोल्ट/Volt की एक साधारण बैटरी रखी गई है, जिसके कारण ये मशीन चलती है।  


कैसे काम करती है ईवीएम। 
इस मशीन में एक उच्च तकनीक युक्त सॉफ्टवेयर काम करता है जो मशीन के रिकॉर्ड को सही रखता है। इस सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की कोई गुंजाइस नहीं होती। एक बार मतदान बटन दबाने के बाद ये मशीन स्वत ही लॉक हो जाती है, जब तक मतदान अधिकारी नियंत्रण इकाई/Control Unit से आगे मतदान के लिए बटन नहीं दबाता तब तक दूसरा वोट नहीं डाला जा सकता। ईवीएम का निर्माण हो जाने के बाद निर्माता सहित कोई भी इस मशीन में बदलाव नहीं कर सकता है। इस मशीन की खास बात ये भी है की यदि कोई व्यक्ति एक साथ दो बटन दबाता है तो उसका मतदान दर्ज नहीं होता है। इस प्रकार ईवीएम मशीन "एक व्यक्ति, एक वोट" के सिद्धांत पर काम करती है। ईवीएम/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन आजकल मैन्युअल और ऑटोमेटिक दोनों तरह की होती हैं। 

ईवीएम/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में अधिकतम 64 उम्मीदवारों के नाम शामिल किए जा सकते हैं, और इसमें  में एक बार में अधिकतम 3840 मतों को रिकॉर्ड किया जा सकता है(नई मशीनों में इस क्षमता को बढ़ाया भी जा सकता है)। एक ईवीएम में ऐसे 4 इकाइयों को जोड़ा जा सकता है, प्रत्येक मतदान इकाई/Ballot Unit में 16 उम्मीदवारों का नाम शामिल रहता है। यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में 64 से अधिक उम्मीदवार होने की परिस्थिति में मतदान के लिए पारंपरिक "मतपत्र या बॉक्स विधि" का प्रयोग किया जा सकता है।


मतदान के दिन आखिरी मतदाता द्वारा वोट डालने के पश्चात् नियंत्रण इकाई/Control Unit का अधिकारी इसके बंद/Close बटन को दबा देता है। इस बटन को बंद कर देने के बाद ईवीएम में कोई भी वोट दर्ज नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, चुनाव की समाप्ति के बाद मतदान इकाई को नियंत्रण इकाई से अलग कर दिया जाता है। मतगणना के दौरान इस मशीन का परिणाम/Result बटन दबाने पर परिणाम को अंकों में स्क्रीन पर दिखती है। 

निर्वाचन आयोग के अनुसार आगामी चुनाव में पहली बार "मतदान इकाई" पर उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिह्न के साथ उनके फोटो भी शामिल होंगे।


भारत में पहली बार कब इस्तेमाल हुआ ईवीएम का?
हमारे देश में ईवीएम/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का पहली बार इस्तेमाल साल 1982 में केरल के सत्तर-पारुर विधानसभा क्षेत्र में किया गया था। साल 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद से भारत में प्रत्येक लोकसभा और राज्य-विधानसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया पूरी तरह से ईवीएम/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन द्वारा ही संपन्न होती आ रही है। आजकल तो EVM का प्रयोग नगरपालिका, जिला परिषद्, ब्लॉक समिति, ग्राम पंचायत के चुनाव में भी होने लगा है। 


भारत द्वारा ईवीएम का विदेशों में भी निर्यात होता है। 
हमारे देश में तैयार ईवीएम/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन नेपाल, भूटान, नामीबिया, फिजी और केन्या जैसे कई और भी देशों में प्रयोग की जाती हैं। साल 2014 में नामीबिया में संपन्न राष्ट्रपति चुनावों के लिए भारत में निर्मित 1700 नियंत्रण इकाई/Control Unit और 3500 मतदान इकाई/Voting Unit का आयात किया गया था। इसके अलावा कई अन्य एशियाई और अफ्रीकी देश भारतीय ईवीएम को खरीदने के लिए आवेदन कर चुके हैं। 

ईवीएम/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के प्रयोग के फायदे। 

  1. एक अनुमान के मुताबिक ईवीएम मशीन के प्रयोग के कारण भारत में एक राष्ट्रीय चुनाव में लगभग 10,000 टन मतपत्र बचाया जाता है।
  2. वर्तमान में एक एम3 EVM की लागत लगभग 17 हजार रुपये आती है, लेकिन भविष्य में इस निवेश के माध्यम से मत-पत्र की छपाई, उसके परिवहन और भंडारण, संरक्षण तथा इनकी गिनती के लिए कर्मचारियों को दिए जाने वाले मेहनताने के रूप में खर्च होने वाले लाखों रूपए की बचत भी की जा रही है।
  3. पारम्परिक मत-पत्र की तुलना में ईवीएम/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन द्वारा मतगणना बहुत ही तेजी से होती है।
  4. ईवीएम मशीनों को मतपेटियों की तुलना में आसानी से एक जगह से दूसरे जगह ले जाया जाता है, क्योंकि यह हल्का और पोर्टेबल होता है।
  5. ईवीएम मशीनों के द्वारा चूंकि एक ही बार मत डाला जा सकता है, इसलिए इसमें फर्जी मतदान में बहुत ज्यादा कमी दर्ज की गई है।
  6. ईवीएम/इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की खास बात ये भी है की इसमें  निरक्षर/अनपढ़ लोगों को भी मत-पत्र प्रणाली की तुलना में ईवीएम मशीन के द्वारा मतदान करने में आसानी होती है।
  7. मतदान होने के बाद ईवीएम मशीन को बंद करने से पहले मशीन की मेमोरी में ऑटोमेटिक ही परिणाम स्टोर हो जाते हैं।
  8. ईवीएम का नियंत्रण इकाई/Control Unit मतदान के परिणाम को दस साल से भी अधिक समय तक अपनी मेमोरी में सुरक्षित रख सकता है।
  9. ईवीएम मशीन में केवल मतदान और मतगणना के समय में मशीनों को सक्रिय करने के लिए बैटरी की आवश्यकता होती है, और जैसे ही मतदान खत्म हो जाता है तो बैटरी को बंद कर दिया जाता है। उसके बाद जब इनमे से गिनती करनी हो तभी इनको ऑन किया जाता है। 
  10. एक भारतीय ईवीएम को काम से काम लगातार15 साल तक उपयोग में लाया जा सकता है। उसके बाद का प्रयोग इसकी कंडीशन पर निर्भर करता है। साथ ही नई मशीन में किये गए बदलावों पर भी निर्भर करता है। 
    What is EVM/Electronic Voting Machine.

मतदान के बाद ईवीएम की सुरक्षा। 
किसी भी चुनाव में प्रयोग करने से पहले और चुनाव के बाद प्रत्येक ईवीएम को सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी में रखा जाता है। वोट डलने के बाद शाम को चुनाव हेतु लगाए गए अधिकारीयों की मौजूदगी में मतदान अधिकारी इस मशीन को सील बंद करता है। हर ईवीएम को एक खास कागज से सील किया जाता है, ये कागज भी करंसी नोट की तरह ही खास तौर से सीलिंग के लिए ही बनाये जाते हैं। करंसी नोट की ही तरह हर कागज़ के ऊपर एक खास नंबर और कोड अंकित होता है। कागजों से सील करने के बाद हर मशीन के परिणाम वाले हिस्से में स्थित छेद को धागे की मदद से बंद किया जाता है। इसके बाद कागज पर गर्म लाख से एक खास पीतल की सील लगा कर बंद किया जाता है। सीलिंग होने के बाद हर ईवीएम को कड़ी सुरक्षा में किसी भी निश्चित सरकारी जगह स्ट्रांग रूम/Strong Room में रखा जाता है। बहुत ही कड़े पहरे के साथ इन मशीनों से मतगणना की जाती है। 



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Sunday, April 7, 2019

स्वामीनाथन आयोग क्या है, इसकी सिफारिशें क्या-क्या है? राष्ट्रीय किसान आयोग क्या है? Swaminathan Aayog

नमस्कार, आपका हमारे इस वेब पोर्टल पर स्वागत है, हम अपने इस पोर्टल पर आपके लिए टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, जॉब ओर सामान्य ज्ञान संबंधी जानकारियां लेकर आते है, जो आप सब के लिए बहुत काम की हो सकती है। आज हम आपके लिए लेकर आये हैं स्वामीनाथन आयोग क्या है और आयोग की सिफारिशें क्या-क्या हैं? 
What is Swaminathan Aayog

स्वामीनाथन आयोग क्या है?
किसानों के हित के लिए स्वामीनाथन आयोग का गठन 18 नवंबर, 2004 को किया गया था। इस आयोग का वास्तविक नाम "राष्ट्रीय किसान आयोग" है और इसके अध्यक्ष एम. एस. स्वामीनाथन हैं। जिसके कारण उन्हीं के नाम पर इस आयोग का नाम स्वामीनाथन आयोग पड़ गया। इसमे किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करे, जिससे किसानों को उनका हक मिल सके। उन्होंने किसानों के हालात सुधारने और कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार से सिफारिशें की थीं, लेकिन अब तक उनकी ये सिफारिशें लागू नहीं की गई हैं। हालांकि केंद्र और राज्य सरकारों का कहना है कि उन्होंने आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया है, लेकिन वास्तविकता तो यही है कि अभी तक इसे पूरी तरह से लागू ही नहीं किया गया है। हमारे देश के किसान बार-बार आंदोलनों के जरिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग करते रहे हैं। 
कोन है स्वामीनाथन ?
एम. एस. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का जनक  भी माना जाता है। वो पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने सबसे पहले गेहूं की एक बेहतरीन किस्म को पहचाना। जिसके कारण तब से भारत में गेहूं उत्पादन में भारी वृद्धि हो रही है। स्वामीनाथन को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका है, जिसमें पद्मश्री (1967), पद्मभूषण (1972), पद्मविभूषण (1989), मैग्सेसे पुरस्कार (1971) और विश्व खाद्य पुरस्कार (1987) महत्वपूर्ण हैं।

स्वामीनाथन आयोग की मूल सिफारिशें। 
रोजगार सुधार। 
स्वामीनाथन आयोग ने खेती से जुड़े हर प्रकार के रोजगारों को बढ़ाने की बात कही थी। आयोग ने कहा था कि वर्ष 1961 में कृषि से जुड़े रोजगार में 75 फीसदी लोग लगे थे, जो कि 1999 से 2000 तक घटकर 59 फीसदी हो गया। इसके साथ ही आयोग ने किसानों के लिए "नेट टेक होम इनकम" को भी तय करने की बात कही थी। 


भूमि बंटवारा। 
स्वामीनाथन आयोग ने अपनी सिफारिश में भूमि बंटवारे को लेकर चिंता जताई थी। इसमें कहा गया था कि 1991-92 में 50 फीसदी ग्रामीण लोगों के पास देश की सिर्फ तीन फीसदी उपजाऊ जमीन थी, जबकि कुछ लोगों के पास ज्यादा जमीन थी। आयोग ने सर्कार को इसकी सही व्यवस्था की जरूरत बताई थी।


भूमि सुधार। 
बंजर और बेकार पड़ी और अतिरिक्त जमीनों की सीलिंग और बंटवारे की भी सिफारिश की गई थी। इसके साथ ही खेतीहर जमीनों के गैर कृषि इस्तेमाल पर भी चिंता जताई गई थी। इसमें जंगलों और आदिवासियों को लेकर भी विशेष नियम बनाने की बात कही गई थी।


सिंचाई सुधार। 
सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी स्वामीनाथन आयोग ने गहरी चिंता जताई थी। साथ ही सलाह दी थी कि सिंचाई के पानी की उपलब्धता सभी के पास होनी चाहिए(नलकूप, नहर, ताल )। इसके साथ ही पानी की सप्लाई और वर्षा-जल के संचय पर भी जोर दिया गया था। आयोग ने पानी के स्तर को सुधारने पर जोर देने के साथ ही "कुआं शोध कार्यक्रम" शुरू करने की बात भी कही थी।

उत्पादन सुधार। 
स्वामीनाथन आयोग का कहना था कि कृषि में सुधार की आवश्यकता है। कृषि में लोगों की भूमिका को बढ़ाना होगा। साथ ही आयोग ने कहा था कि कृषि से जुड़े सभी कामों में "जन सहभागिता" की जरूरत होगी, चाहे वह सिंचाई हो, जल-निकासी हो, भूमि सुधार हो, जल संरक्षण हो या फिर सड़कों और कनेक्टिविटी को बढ़ाने के साथ शोध से जुड़े अन्य काम हों।

खाद्य सुरक्षा। 
स्वामीनाथन आयोग ने समान जन वितरण योजना की सिफारिश भी की थी। इसमें पंचायत की मदद से पोषण योजना को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की भी बात कही गई थी। इसके अलावा "स्वयं सहायक समूह" बनाकर खाद्य एवं जल बैंक बनाने की बात भी इसमें कही गई थी।


किसान आत्महत्या रोकना। 
किसानों की बढ़ती आत्महत्या को लेकर भी आयोग ने चिंता जताई थी। स्वामीनाथन आयोग ने ज्यादा आत्महत्या वाले स्थानों को चिह्नित कर वहां पर सरकार द्वारा विशेष सुधार कार्यक्रम चलाने की बात कही थी। इसके अलावा सभी तरह की फसलों के बीमा की जरूरत बताई गई थी। साथ ही आयोग ने कहा था कि किसानों के स्वास्थ्य को लेकर खास ध्यान देने की जरूरत है। इससे उनकी आत्महत्याओं में कमी आएगी।

ऋण और बीमा। 
स्वामीनाथन आयोग का कहना था कि ऋण प्रणाली की पहुंच सभी तक होनी चाहिए। फसल बीमा की ब्याज-दर 4 फीसदी/प्रतिशत होनी चाहिए। किसानों के कर्ज वसूली पर रोक लगाई जाए। साथ ही "कृषि जोखिम फंड" भी बनाने की बात आयोग ने की थी। पूरे देश में फसल बीमा के साथ ही एक कार्ड में ही फसल भंडारण और किसान के स्वास्थ्य को लेकर व्यवस्थाएं की जाएं। इसके अलावा मानव विकास और गरीब किसानों के लिए विशेष योजना शुरू करने की बात कही गई थी। 

वितरण प्रणाली में सुधार। 
वितरण प्रणाली में सुधार को लेकर भी स्वामीनाथन आयोग ने सिफारिश की थी। इसमें गांव के स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पूरी व्यवस्था का ढांचा त्यार किया गया था। इसमें किसानों को फसलों की पैदावार को लेकर सुविधाओं को पहुंचाने के साथ-साथ विदेशों में फसलों को भेजने की व्यवस्था की बात कही गई थी। साथ ही फसलों के आयात और उनके भाव पर नजर रखने की व्यवस्था बनाने की भी सिफारिश की गई थी।


प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना। 
स्वामीनाथन आयोग ने किसानों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की बात भी कही है। इसके साथ ही अलग-अलग फसलों को लेकर उनकी गुणवत्ता और वितरण पर विशेष नीति बनाने को कहा था। साथ ही स्वामीनाथन आयोग ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की सिफारिश भी की थी।

What is Swaminathank aayog?


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Monday, April 1, 2019

लोको पायलट/LOCO Pilot/Train Driver कैसे बने, सम्पूर्ण जानकारी इस पोस्ट में पढ़ें। How to become Loco pilot !

नमस्कार आपका हमारे वेब पोर्टल पर बहुत स्वागत है, हमारे इस पोर्टल पर आप Technology और Education से सम्बंधित जानकारी पा सकते हैं। आज के इस लेख में हम आपके लिए लाये हैं लोको पायलट/लोकोमोटिव पायलट/LOCO Pilot यानि रेल का ड्राइवर कैसे बने, क्या-क्या योग्यता होनी चाहिए इसके लिए आपकी, इस आर्टिकल में आप सब कुछ जान पाएंगे। हम आपको बता दे की ट्रेन ड्राईवर को ही लोको पायलट बोला जाता है। पूरी जानकारी के लिए कृपया पोस्ट को पूरा पढ़ें। 

How to become LOCO Pilot?


जब भी हम कही ट्रेन से सफ़र से करते है तो हमारे मन में भी कभी न कभी ट्रेन ड्राईवर यानि लोको पायलट बनने का विचार जरुर आता है। या फिर हम उत्सुकतावश इनके बारे में जानना चाहते हैं की ट्रैन ड्राइवर के लिए क्या-क्या योग्यता होनी चाहिए। हर छात्र या नौजवान का सपना होता है की वो कोई ऐसा काम करे जो कुछ खास और कुछ अलग हो। को पायलट/Loco Pilot एक भारतीय रेलवे/Indian Railway का पद है जिसमे आवेदक को ट्रेन चलाना होता है। लोको पायलट बनने के लिए महिला और पुरुष दोनों आवेदन कर सकते हैं। 

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लोको पायलट कैसे बने? इसके लिए शैक्षणिक योग्यता, उम्र, शारीरिक मापदंड, सैलरी,चयन प्रक्रिया इत्यादि सभी के बारे में पूरा विवरण निचे दे रहे हैं। How to become loco pilot?

लोको पायलट बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता। 
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो आपको किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10th Pass और 12th Pass होना चाहिए। उसके बाद आपने 2 साल का ITI डिप्लोमा भी पास किया हुआ होना चाहिए जो की इलेक्ट्रिकल, मैकेनिक, ऑटोमोबाइल इनमे से किसी भी ट्रेड से होनी चाहिए। यदि आपके पास इन ट्रेड से बैचलर इंजिनियर डिग्री भी है तो भी आप Loco Pilot के लिए अप्लाई कर सकते है। ITI डिप्लोमा और ट्रेड से बैचलर इंजीनियरिंग डिग्री भी किसी मान्यता प्राप्त संसथान से ही होनी चाहिए। 


लोको पायलट बनने के लिए आयु सीमा।
अगर आप भी लोको पायलट बनना चाहते हैं तो आपकी उम्र अगर आप सामान्य/General वर्ग से हैं तो आपकी उम्र 18 से 28  वर्ष के बीच में होनी चाहिए, लेकिन अगर आप अन्य वर्ग(SC, ST, OBC,) में आते हैं तो आपके लिए यहां पर कुछ छूट का प्रावधान भी है। इसके लिए आपको लिए आपको कास्ट सर्टिफिकेट/Cast Certificate देना होता है।


लोको पायलट बनने के लिए शारीरिक मापदंड। 
इस पद के लिए शारीरिक मापदंड की बात करें तो इस भर्ती के अंतर्गत लम्बाई को लेकर कोई दिक्कत नहीं होती, हाँ आपका वजन आपके लम्बाई के अनुसार ही होना चाहिए। मेडिकल टेस्ट में आँखों का टेस्ट होता है। आपके देखने की शक्ति अच्छी होनी चाहिए और आपमें दूर तक देखने की अच्छी शक्ति होनी चाहिए। साथ ही आपकी आँखों में किसी प्रकार की कोई प्रॉब्लम नहीं होना चाहिए, जैसे - कलर विजन, नाईट विजन और कोई वीकनेस इत्यादि। आपका विजुअल स्टार कार्ड डिस्टेंस विजन 6/6, 6/6  बिना चश्मे के होना चाहिए। लोको पायलट बनने के लिए Medical योग्यता में आंख का सबसे बड़ा रोल होता है, अगर आपकी आँख में थोड़ी भी दिक्कत है तो आपके लिए ये एक समस्या बन सकती है। ज्यादातर आवेदक आँख की कमी के कारण इस परीक्षा से बाहर कर दिए जाते है।  गर आपकी आँखे नार्मल/सामान्य पाई जाती है और आप ये टेस्ट पास कर लेते है तो ही आपको ट्रेनिंग पर भेजा जाता है।


लोको पायलट बनने के लिए चयन प्रक्रिया। 
लोको पायलट की Vacancy  जब भी आती है और आपने इसके लिए अप्लाई कर दिया है, तो आपको सबसे पहेले लिखित परीक्षा देनी होती है जिसमे आपको 120 सवाल पूछे जाते है। लिखित परीक्षा के आधार पर ही कैंडिडेट की मेरिट लिस्ट बनाई जाती है, उसके बाद चयनित कैंडिडेटों को साइकोलॉजिकल/Psychological टेस्ट के लिए बुलाया जाता है। इन दोनों परीक्षाओं लिखित परीक्षा और साइकोलॉजिकल/Psychological टेस्ट/Presence of Mind Test में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के लिए भेज दिया जाता है। सबसे पहले आपको सहायक लोको पायलट की ट्रेनिंग दी जाती है। 

 How to become train driver


लोको पायलट पेपर मॉडल। 
लोको पायलट पेपर मॉडल की अगर बात करें तो इसमें लगभग 100 प्रश्न आपसे लिखित पूछे जाते है, जिसके लिए आपको 90 मिनट का समय दिया जाता है। इस पेपर मे सामान्य-अध्ययन, सामान्य ज्ञान, रीजनिंग और गणित से सम्बंधित सवाल पूछे जाते हैं। 

लोको पायलट की सैलरी। 
सहायक लोको पायलट की सैलरी की बात करें तो बेसिक सैलरी/Basic Salary 5200 से 20,000 होती है, और ग्रेड पे/Grade Pay 1900 होता है। कुल मिलाकर इनकी सैलरी लगभग 30000 से 32000 रूपये मिलती है।अनुभव के आधार पर आपकी सैलरी बढ़ती जाती है। 

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