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Saturday, August 17, 2019

कम्प्यूटर की पीढियाँ/कंप्यूटर जनरेशन कितनी और कौन-कौनसी हैं? Generation of Computer in Hindi

दोस्तो नमस्कार हमारे वेब पोर्टल www.lshometech.com पर आपका स्वागत है, हम अपने इस पोर्टल पर समसामियिक जानकारी के साथ-साथ Technology ओर Education से संबंधित आर्टिकल पोस्ट करते रहते हैं, आज के इस पोस्ट में हम बात करेंगे कंप्यूटर से सम्बंधित पीढ़ियों/Generations के बारे में। 
वैसे तो कंप्यूटर का विकास 16 वीं शताब्दी से माना गया है जिसके परिणामस्वरुप ही आधनिक कंप्यूटर का विकास हुआ। हालांकि, इसके बाद कंप्यूटर के विकास में तेज़ी से बदलाव आया। प्रत्येक पीढ़ी के बाद, कंप्यूटर के आकार-प्रकार, कार्यप्रणाली और कार्यशीलता में बहुत बदलाव हुआ है और वो लगातार हो भी रहा है। वर्तमान के कंप्यूटर काफी आधुनिक और विकसित है। इसी क्रम-विकास की अवधि के दौरान, कंप्यूटर में बहुत सारे परिवर्तन आये जिसने कंप्यूटरों की नई पीढीयों को जन्म दिया। इसमें विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर का आविष्कार हुआ जिसे हम जनरेशन ऑफ कंप्यूटर/Generation of Computer/ कंप्यूटर की पीढ़ियां के रूप में जानते है। इन पीढ़ियों को समय के अनुसार पांच अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है, जिनका विवरण हम निचे दे रहे हैं।

Generation of Computer in Hindi

ये भी पढ़ें :


कम्प्यूटर की पीढियाँ (Generation of Computer in Hindi)
  1. फर्स्ट जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (1940 – 1956) पहली पीढ़ी 
  2. सेकंड जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (1956 – 1963) दूसरी पीढ़ी 
  3. थर्ड जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (1964 – 1971) तीसरी पीढ़ी 
  4. फोर्थ जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (1971 – 1980) चौथी पीढ़ी 
  5. फिफ्थ जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (1980 और भविष्य) पांचवी पीढ़ी 
Generation of Computer in Hindi

फर्स्ट जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (1940 – 1956) पहली पीढ़ी
फर्स्ट जनरेशन की समय अवधि 1940-1956 थी, जो "वैक्यूम ट्यूब/Vacuum Tube" टेक्नोलॉजी पर आधारित थी।
पहले पीढ़ी के कंप्यूटरों में वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया गया था। वैक्यूम ट्यूब एक नाजुक कांच का यंत्र होता था जो फिलामेंट्स का इस्तेमाल Electron Source के रूप में  करता था। यह इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को नियंत्रित कर घटा और बढ़ा सकता था। इन वैक्यूम/Vacuum ट्यूबों का उपयोग गणनाओं के साथ-साथ डाटा भंडारण और नियंत्रण के लिए भी किया जाता था। पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर (इलेक्ट्रॉनिक नुमेरिकल इन्तेग्रटर और कंप्यूटर) यानी ENIAC था, इसे जे. प्रेस्पेर एच्केर्ट और जॉन वी ने बनाया था। 

पहले पीढ़ी/फर्स्ट जनरेशन के कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े और भारी होते थे, जिनको रखने के लिए बहुत ही बड़े कमरे की आवश्यकता होती थी।  ये कंप्यूटर बड़ी मात्रा में गर्मी पैदा करते थे, इसलिए कंप्यूटर के उचित रख-रखाव और काम लेने के लिए एयर कंडीशन की आवश्यक होती थी। इसके प्रोग्राम्स उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग/High Level Programming Language यानी भाषाओं में लिखे जाते थे, जो एक कंपाइलर द्वारा असेंबली भाषा या मशीन की भाषा में अनुवादीत/translate किये जाते थे। यह कंप्यूटर यानी ENIAC 30 से 50 फीट लंबा था, 30 टन वजन, 18,000 वैक्यूम ट्यूब, 70,000 रजिस्टरों, 10,000 कैपेसिटर्स से चलता था और इसके लिए 150,000 वाट बिजली की जरूरत होती थी।

असेंबली भाषा प्रोग्राम एक असेम्बलर के द्वारा (असेंबली भाषा कंपाइलर) मशीनी भाषा में पुन: वितरित किया जाता था। ENIAC कंप्यूटर के समाप्त होने से पहले, "वॉन न्यूमैन" ने एक स्वचालित/Automatic कंप्यूटर EDVAV को डिज़ाइन किया।

EDVAV/इलेक्ट्रॉनिक डिस्क्रीट वेरिएबल आटोमेटिक कंप्यूटर, इसमें प्रोग्राम्स के साथ-साथ चल रहा डाटा भी मेमोरी में रिकॉर्ड होता था।  इस कंप्यूटर में डेटा और निर्देश दोनों बहुत तेजी से प्रोसेस होते थे। सन 1952 में "एच्केर्ट" और "मौच्ली" ने पहला वाणिज्यिक कंप्यूटर "यूनिवर्सल ऑटोमैटिक कम्प्यूटर/UNIVAC" विकसित किया था।

[पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर में इन्टरनल/आंतरिक मेमोरी के रुप में मेग्नेटिक/चुंबकीय ड्रम का उपयोग किया जाता था। इस जनरेशन में प्रोग्रामिंग, मशीन और असेम्बली लैंग्वेज/Programming in Machine and Assembly Language में की जाती थी। किसी भी कंप्यूटर की मशीन लेंग्वेज केवल 0 और 1 कोड पर आधारित होती हैं। 

सेकंड जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (1956 – 1963) दूसरी पीढ़ी 

सेकंड जनरेशन ऑफ कंप्यूटर/Second Generation of Computer  इसकी समय अवधि 1956-1963 थी, जो "ट्रांजिस्टर/Transistor" टेक्नोलॉजी पर आधारित थी। सेकंड जनरेशन यानी दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों में, वैक्यूम ट्यूब की जगह ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया गया था। इसका विकास "विलियम शोक्क्ली" ने 1947 में किया था। इसके  ही कंप्यूटर का साइज छोटा होने लगा था और कंप्यूटर की गति भी तेज होने लगी थी, साथ ही ये कंप्यूटर पहले की तुलना में कम बिजली से चलने लगे थे। इन कंप्यूटरों पर प्रोग्रामिंग करना संभव था  तथा इस चरण के दौरान कंप्यूटर का प्रयोग मुख्यतः परमाणु ऊर्जा उद्योग में उपयोग किया जाने लगा था। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में मेमोरी के तौर पर चुम्बकीय टेप/Magnetic  Tape का प्रयोग किया जाता था। 

थर्ड जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (1964 – 1971) तीसरी पीढ़ी 
थर्ड जनरेशन ऑफ कंप्यूटर/Third Generation of Computer इसकी समय अवधि 1964-1971 थी, जो "एकीकृत परिपथ/इंटीग्रेटेड सर्किट/Integrated Circuit/IC" टेक्नोलॉजी पर आधारित थी। यही वो समय था जब कंप्यूटर में I.C. का इस्तेमाल किया गया था। ट्रांट्रांज़िस्टरों का साइज भी बहुत छोटा कर दिया गया और उन्हें सिलिकॉन चिप पर रखा गया। इन सिलिकॉन चिप को अर्धचालक/Semiconductors कहते हैं। तीसरी पीढ़ी के विकास ने कंप्यूटर की गति और भी बढ़ा दी थी क्योंकि एक IC में ट्राजिस्टर, रेजिस्टर और कैपेसिटर तीनों ही समाहित कर दिए गए थे। इससे कम्प्यूटर का आकार भी अत्यंत छोटा हो गया था और इसका प्रयोग भी सरल हो गया था।  तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटरों में एक ही समय में कई अलग-अलग कार्यक्रम चल सकते थे  यही वो समय था जब कंप्यूटर आम आदमी की पहुंच के भीतर आ गया था। स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट के कारण इन कंम्यूटरों की गति माइक्रो सेकंड से नेनो सेकंड तक हो गयी।


तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटरों में ऑपरेटिंग सिस्टम/Operating System का प्रयोग किया जाने लगा था, साथ ही बहुत सारी नई-नई हाई लेवल लैंग्वेज/High Level Language का विकास भी हुआ जैसे की -BASIC/Beginner’s All Purpose Symbolic Instruction Code. आई सी के कारण कंप्यूटर ओर ज्यादा तेज हो गया था तथा इसके आंतरिक कार्य भी स्वचालित/Automatic हो गये। 

फोर्थ जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (1971 – 1980) चौथी पीढ़ी 
फोर्थ जनरेशन ऑफ कंप्यूटर/Fourth Generation of Computer इसकी समय अवधि 1971-1980 थी, जो की  "VLSI माइक्रोप्रोसेसर/VLSI Microprocessor" टेक्नोलॉजी पर आधारित थी। कंप्यूटर के क्षेत्र में सबसे बड़ी क्रांति इस पीढ़ी को माना जाता है। कंप्यूटर का उपयोग अब हम सभी PC/पर्सनल कंप्यूटर के रूप में भी करने लगे है। चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों में, पहली बार माइक्रोप्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया था। ये कंप्यूटर बहुत ज्यादा उपयोग हुआ हैं। इस जनरेशन में माइक्रोप्रोसेसर चिप्स विकसित किए गए थे। अंकगणित संचालन के लिए 0 और 1 को कोडित किया गया था। ये बाइनरी संख्या के रूप में जाना जाता है इस पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर बहुत छोटे हैं वे हाथ की हथेली में फिट हो सकते हैं इन कंप्यूटरों को तेज छोटे से छोटा, गति तेज और सस्ते बनाया गया और व्यापक रूप से उपयोग किया जाता रहा है। इस पीढ़ी के दौरान माउस और अन्य पेरिफेरल डिवाइस, जैसे जॉयस्टिक इत्यादि को विकसित किया गया था।  इसकी पीढ़ी के दौरान इंटरनेट का विकास भी बहुत ज्यादा हुआ  जिसके कारण आज पूरी दुनिया आपस में एक दूसरे के साथ जानकारी साझा कर सकती है। इसी दौरान उच्च गति वाले नेटवर्क का विकास हुआ जिन्हें आप लैन/LAN/local area networkऔर वैन/WAN/wide area network के नाम से जानते हैं।

एक छोटी सी चिप में लाखो ट्रांजिस्टरों को समाहित कर एक माइक्रोप्रोसेसर का निर्माण इसी अवधि में किया गया था  जिसे Large Scale Integrated Circuit के नाम दिया गया। पहला माइक्रो कम्प्यूटर MITS नाम की प्रसिद्ध कंपनी ने बनाया था।आज दुनिया में दो बड़ी माइक्रोप्रोसेसर बनाने वाली कंपनिया Intel और AMD है। 

ऑपरेटिंग सिस्टम MS DOS/ माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम का पहली बार इस्तेमाल इसी पीढ़ी में हुआ इसके साथ ही कुछ समय बाद माइक्रोसॉफ्ट विंडोज भी कंप्यूटरों में आने लगी।माइक्रोसॉफ्ट विंडोज/Microsoft Windows  आने के बाद से ही मल्टीमीडिया का प्रचलन प्रारम्भ हुआ। इसी अवधि में C भाषा का विकास हुआ, जिससे प्रोग्रामिंग करना और सरल हो गया।  


फिफ्थ जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (1980 और भविष्य) पांचवी पीढ़ी 
फिफ्थ जनरेशन ऑफ कंप्यूटर/Fifth Generation of Computer इसकी समय अवधि 1980 से आज तक है या भविष्य तक चल सकती है। ये पीढ़ी पूरी तरह ULSI माइक्रोप्रोसेसर/ULSI Microprocessor टेक्नोलॉजी पर आधारित है। ULSI  तकनीक यानी Ultra Large Scale Integration तकनीक पर आधारित है। हम कंप्यूटर की पांचवीं पीढ़ी में काम कर रहे है जिसपर अभी काम चल रहा है। यह अभी तक यह स्पष्ट नहीं है की पाचवी पीढ़ी किस दिशा में जाएगी क्यूंकि आये दिन कंप्यूटर जगत में एक नया आविष्कार हमारे सामने आ रहा है। इस पीढ़ी के कम्प्यूटर में स्वयं सोचने की क्षमता पैदा की जा रही है अर्थात इस जनरेशन के कम्प्यूटर्स में कृत्रिम बुद्धि यानी Artificial Intelligence क्षमता विकसित की जा रही है। आज के कम्प्यूटर को हर क्षेत्र में कार्य करने योग्य बनाया जा रहा है और कुछ हद तक हम इसमें सफल भी हो चुके हैं। उदाहरण के लिये विंडोज कोर्टाना/Windows Cortana, गूगल असिस्टेंट/Google Assistant, एप्पल सीरी/Apple Siri इत्यादि को आप देख ही रहे हैं, कंप्यूटर के लिए ऐसे सॉफ्टवेयर विकसित कर लिए गए हैं जिनको हम कुछ भी पूछ सकते हैं  और वाद-विवाद भी कर सकते हैं। 

इस पीढ़ी के कंप्यूटर में हाई लेविल प्रोग्रामिंग भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। GUI/Graphical User Interface की सहायता से इसे और अधिक सरल बनाया जा रहा है। ये कंप्यूटर किसी समस्या के हल करने के लिए इन्टरनेट का इस्तेमाल करते है क्योंकि ये नेटवर्को के माध्यम से जुड़े होते है। कुछ कंप्यूटर्स को तो मनुष्य की तरह व्यव्हार तथा सभी काम खुद से करने के लिए डिजाईन किया जा रहे है जिन्हें रोबोट कहाँ जाता है। आजकल मेडिकल और रक्षा उपकरणों में इस तरह के रोबोट कंप्यूटर बहुतायत में प्रयोग किये जा रहे हैं, और आने वाले समय में सम्पूर्ण रूप से यही काम करेंगे। 

Generation of Computer in Hindi



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कंप्यूटर क्या है?, कंप्यूटर की परिभाषा, कंप्यूटर का नामकरण। सम्पूर्ण ज्ञान हिन्दी में। What is computer?

दोस्तो नमस्कार 
हमारे वेब पोर्टल www.lshometech.com पर आपका स्वागत है, हम अपने इस पोर्टल पर समसामियिक जानकारी के साथ-साथ Technology ओर Education से संबंधित आर्टिकल पोस्ट करते रहते हैं, आज के इस पोस्ट में हम बात करेंगे कंप्यूटर से सम्बंधित ज्ञान बारे जैसे- कंप्यूटर क्या है?, कंप्यूटर की परिभाषा क्या है?, कंप्यूटर की विशेषताएं, कंप्यूटर का महत्व इत्यादि। 
What is computer definition?

सर्वप्रथम जान लेते हैं की कंप्यूटर है क्या? वैसे तो आजकल पुरे विश्व में कंप्यूटर का बोलबाला है, और हमारा देश भी इस कड़ी में बहुत तरक्की पर है, ज्यादातर लोग तो कंप्यूटर के बारे में जानते ही हैं लेकिन फिर भी हमारे देश में बहुत सारे लोग इससे अभी तक अनभिज्ञ हैं तो ये पोस्ट उनकी जानकारी के लिए है। कंप्यूटर आज हमारी रोजमर्रा/Daily की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चूका हैं। कंप्यूटर के बिना हमारा जीवन अधूरा है। आजकल हम कहीं भी किसी भी छोटे से बड़े दफ्तर में जाते हैं तो सारा काम कंप्यूटर से ही किया जाता है।


कंप्यूटर क्या है? (What is Computer)
कंप्यूटर/Computer शब्द लैटिन भाषा के "कंप्यूट/Compute" शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है -गणना करना। कंप्यूटर को हिंदी भाषा में “संगणक” कहा जाता है। सहज शब्दों में, कम्प्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण/Electronic Device है जो किसी भी डेटा/Data को इनपुट/Input के रूप में लेता है और उसे प्रोसेस/Process करता है तथा परिणामों/Results को आउटपुट/Output के रूप में हमे दिखाता है। 

आप इसे इस तरह से भी समझ सकते है की कंप्यूटर आज के जमाने की एक ऐसी विधुतीय मशीन है जो हमारे लगभग सभी प्रकार के कामों को बड़े ही सहज और सरल तरीके से और बहुत ही कम समय में बिलकुल त्रुटि रहित सभी कार्यों को किर्यान्वित कर सकने वाली मशीन है। 

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार कंप्यूटर की परिभाषा  "कंप्यूटर एक स्वचालित इलेक्ट्रानिक मशीन है, जो अनेक प्रकार की तर्कपूर्ण गणनाओं के लिए प्रयोग किया जाता है।"

ऐसे बहुत से लोग अब भी होंगे जो कंप्यूटर के बारे में सभी कुछ जानने के इच्छुक होंगे जैसे की - 
कंप्यूटर के जन्मदाता कौन हैं? (Who is The Inventor of Computer) 
कंप्यूटर काम कैसे करता है? (How Does Computer Work?)
कंप्यूटर की फुल फॉर्म क्या है? (What is the Full Form of Computer?)
कंप्यूटर के फायदे और नुकसान (Advantages and Disadvantages of Computer)


कंप्यूटर का नामकरण। निम्न उल्लेखित शब्दों के मेल से बना है कंप्यूटर नाम। 
C Common
O Operating
M Machine
P Particularly
U Used for
T Technological and 
E Engineering
R Research
What is computer definition?

कंप्यूटर के जन्मदाता कौन हैं? (Who is The Inventor of Computer)
सर्वप्रथम कंप्यूटर का आविष्कार/Invention अंग्रेजी गणितज्ञ "चार्ल्स बैबेज/Charles Babbage" ने किया था। उन्होंने साल 1822 में पहला मैकेनिकल कंप्यूटर/Mechanical Computer बनाया था। इसी कंप्यूटर के आधार पर आज के सभी कंप्यूटर काम कर रहे हैं।  "चार्ल्स बैबेज" को आधुनिक कंप्यूटर का पिता/जन्मदाता कहा जाता है। हालाँकि शुरू में उन्होंने इसे गणित की बड़ी गणना/Calculations करने के लिए एक कंप्यूटर/Computer  यानि नए जमाने की मशीन बनाई थी। चार्ल्स बेवेज की डिजिटल प्रोग्रामेबल कंप्यूटर/Digital Programmable Computer की सोच ही आधुनिक कंप्यूटरों का आधार बन गई।  यही कारण है की "चार्ल्स बेवेज" को कंप्यूटर का जनक/Inventor of Computer) कहा जाता है। 
मैकेनिकल कंप्यूटर/Mechanical Computer बनाने  के कुछ सालों बाद चार्ल्स बैबेज ने 1837 में एक स्वचालित कंप्यूटर सिस्टम/Automated Computer System बनाने की परिकल्पना की थी, लेकिन पैसे की कमी के कारण वह इसे पूरा नहीं कर सके।


ये भी पढ़ें :

कंप्यूटर का महत्व/Importance of Computer 
आजकल जहाँ कहीं भी आप जायेंगे हर जगह कंप्यूटर से कार्य होता मिलेगा जैसे - अस्पतालों, बैंकों, दूरसंचार, रक्षा सम्बंधित कार्यो, उद्द्योग एवं व्यापार, कार्यालयों, परिवहन, मॉल और घरों में कंप्यूटर हर जगह हैं। यहाँ तक की आज छोटी सी किरयाने की दुकान पर भी आपको कंप्यूटर मिल जायेगा, वाहन पंजीकरण, वाहन चेकिंग और विभिन्न प्रकार की सूचनाओं तथा डाटा को एकत्रित करने तथा गणना करके संगठित रखने और हमें सूचित करने में सहायता करते हैं। आज का युग कंप्यूटर का युग है। आज इसका महत्व इतना बढ़ गया है की आने वाले वक़्त में बिना कंप्यूटर के कोई कार्य नहीं होगा।

आइये जाने कंप्यूटर की विशेषताएं /Characteristics of Computer 
कम्प्यूटर में एक बार किसी भी प्रकार का डाटा इनपुट करने के पश्चात यह उस डाटा को दिये गये निर्देशों के आधार पर उसे प्रोसेस/Process  कर परिणाम/Result को आउटपुट/Output के रूप में हमे प्रदान करता है। इसके द्वारा अधिक सूक्ष्म/Micro समय में अधिक तीव्र गति से गणनाएं की जा सकती है।


स्वचालित/Automatic
आजकल कंप्यूटर एक स्वचालित उपकरण बन गया है। यह एक बार उपयोगकर्ता/User से सारा डाटा इनपुट के रूप में लेकर तुरंत उसका विश्लेषण करता है तथा परिणामों को आउटपुट/output  के रूप में हमे प्रदान करता है।

गति/speed 
कम्प्यूटर में एक बार डेटा इनपुट करने के पश्चात उन्हें दिए गये निर्देशों के अनुसार एक सेकंड में लाखों बार गणनाएं कर सकता है। इसकी काम करने की गति बहुत तेज होती है, तथा यह बिना थके लगातार काम करता रहता है।

सटीकता/Accuracy
कम्प्यूटर एक ऐसी मशीन है जिसमे उपयोगकर्ता निर्देश देते समय अगर कोई गलती न करे तो, जो निर्देश कंप्यूटर को दिए जाते हैं  तो कंप्यूटर उस डाटा का विश्लेषण कर हमे आवश्यक और सही परिणाम देता है जो की काफी तेज तथा त्रुटिरहित और सटीक होता है।


गोपनीयता/Secrecy
लगभग सभी कंप्यूटर में डाटा की सुरक्षा के लिए पासवर्ड विकल्प होता है जिसके द्वारा हम प्रमाणीकरण/Authentication लगा सकते है तथा अपने डाटा की सुरक्षा पासवर्ड/Password के जरिये कर सकते है। 

विशाल भण्डारण क्षमता/Large storage capacity 
कंप्यूटर में डाटा संग्रहण/storage करने के लिए बाहरी तथा आंतरिक भाग होते है जैसे की, हार्ड डिस्क/HardDisk, CD, DVD, BlueRay, फ़्लैश ड्राइव इत्यादि। 




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Monday, July 22, 2019

चंद्रयान-2 मिशन हुआ सफलतापूर्वक लांच। जाने इसके बारे में। chandryaan-2

दोस्तो नमस्कार 
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India on monn

जैसा किआप सभी को विदित होगा की चंद्रयान-2 को इसी महीने यानि जुलाई 2019 की 15 तारीख को सुबह 2 बजकर 51 मिनट पर प्रक्षेपित किया जाना था, प्रक्षेपण से लगभग 52 मिनट पहले इसमें कुछ तकनिकी खराबी आने के कारण इसके लांच को रोक दिया गया था। उसके एक दिन बात इसकी अगली प्रक्षेपण तिथि की घोषणा की गई थी, जो थी 22 जुलाई 2019 और समय 2 बजकर 43 मिनट। 
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आज यानि 22 जुलाई 2019 को इसे इसके तयशुदा वक़्त पर आंध्र-प्रदेश के श्री-हरोकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया जा चूका है। इसकी लॉन्चिंग GSLV मार्क-3 से की गई है। 
CHANDARYAAN-2 MISSION

चंद्रयान-2 का मिशन क्या होगा प्रक्षेपण के बाद आइये जाने। 

  1. यह यान 2:43 पर लांच होने के 16 मिनट बाद पृथ्वी की कक्षा में पहुँच गया जैसा की पहले से तय था। 
  2. पृथ्वी की कक्षा में पहुँचने के बाद Orbitor/ऑर्बिटर 23 दिन तक लगातार पृथ्वी के 4 चक्कर लगाएगा।  
  3. इसके बाद यह 7 दिन में चन्द्रमा की कक्षा में पहुंचेगा। ऑर्बिटर यहाँ पर लगातार 13 दिन तक इसके चक्कर लगाएगा। 
  4. 43 वें दिन ऑर्बिटर से लैंडर अलग होगा और 48 वें दिन चन्द्रमा की सतह पर उतरेगा, इस लैंडर का नाम है "Vikram/विक्रम"। 
  5. लैंडर के चन्द्रमा की सतह पर उतरने के बाद लैंडर से रोवर बाहर आएगा और चन्द्रमा की सतह से कुछ सैंपल और अन्य जानकारी जुटाएगा।  इस रोवर का नाम है "Pargyan/प्रज्ञान"। 


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तकनिकी खराबियों के कारण टला चंद्रयान-2 मिशन 15/07/2019


ISRI यानि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संसथान ने प्रक्षेपित किये जाने वाले यान चंद्रयान-2 को फ़िलहाल कुछ दिन के लिए प्रक्षेपण को किन्ही तकनिकी खराबियों के कारण टाल दिया गया है। इसरो ने सोमवार सुबह एक ट्वीट के माध्यम से ये जानकारी दी है।  

ISRO के अनुसार प्रक्षेपण से लगभग 56 मिनट पहले यान में कुछ तकनिकी खराबी आ गयी थी, सावधानी बरतते हुए इसरो के वैज्ञानिकों ने इसे दुरुस्त करने के लिए चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को अभी टाल दिया है। इस यान के प्रक्षेपण की नयी तारीख जल्द ही जारी की जाएगी। 



14 जुलाई रविवार सुबह से ही पूरी इसरो टीम इस लांच में जुटी हुई थी, इसकी तयारी सुबह 6 बजकर 51 मिनट पर शुरू हुई थी। चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आज सुबह यानी 15 जुलाई तड़के 2 बजकर 51 मिनट पर होना था। इसे हर बार की तरह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया जाना था। इसमें लांच से कुछ समय पहले ही तकनीकी खामियों के कारण इसे कुछ दिन के लिए टालना पड़ा। भारत ने इस मिशन के लिए बहुत पहले से तयारी कर रखी थी। इसरो के इस मिशन में GSLV-MK3 M1 प्रक्षेपण यान का इस्तेमाल किया जा रहा है। ISRO ने बताया कि मिशन के लिए रिहर्सल कार्य शुक्रवार को पूरा हो गया था। 

इसरो के इस यान का उदेश्य क्या है?


इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों, संसाधनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण करना बताया गया है। आपको बतादें की चंद्रमा पर भारत के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 ने वहां पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी। इस मिशन में चंद्रयान-2 के साथ कुल 13 स्वदेशी Pay-Load यान वैज्ञानिक उपकरण भेजे जा रहे हैं। इनमें तरह-तरह के आधुनिक कैमरे, स्पेक्ट्रोमीटर, राडार, प्रोब और बहुत तरह के सिस्मोमीटर शामिल होंगे। प्रक्षेपित किये जाने वाले चंद्रयान-2 के 3 हिस्से हैं। 

इसका ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में चक्कर लगाएगा। लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। इसे विक्रम नाम दिया गया है। यह 2 मिनट प्रति सेकंड की गति से चंद्रमा की जमीन पर उतरेगा। प्रज्ञान नाम का रोवर लैंडर से अलग होकर 50 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर घूमकर तस्वीरें लेगा।


इस प्रक्षेपण की खास बात ये है की इसमें अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा/NASA का एक पैसिव पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की सटीक दूरी का पता लगाना है। यह मिशन इस मायने में खास है कि चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा और सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अब तक दुनिया का कोई मिशन नहीं उतरा है। 


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Saturday, July 6, 2019

पटवारी कैसे बने और क्या-क्या कार्य होते हैं पटवारी के? Patwari kaise bne.

दोस्तो हमारे वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है, हम अपने इस पोर्टल पर नोकरियों की जानकारी के साथ-साथ Technology ओर Education से संबंधित आर्टिकल पोस्ट करते रहते हैं, इन्हें पढ़कर आप किसी भी सरकारी नोकरी की पूर्ण जानकारी पा सकते हैं।


आज के इस आर्टिकल में हम बात करने वाले है पटवारी की नोकरी के बारे में कि पटवारी क्या होता है या पटवारी किसे कहते हैं? 
दोस्तों पटवारी एक ऐसा पेशा है जिसमे बहुत इज्जत होती है, साथ ही ये समाज के हर वर्ग के साथ जुड़ा हुआ पद भी होता है। छोटे से लेकर बड़े व्यक्ति या अधिकारी को पटवारी की किसी भी भूमि से सम्बंधित खरीद-फरोख्त या भूमि से सम्बंधित अन्य कार्यों हेतु पटवारी की आवश्यकता होती है। पटवारी भारत सरकार के भू ओर राजस्व विभाग/Revenue Department का कर्मी होता है। पटवारी भारत के ग्रामीण ओर शहरी क्षेत्रों में सरकार द्वारा घोषित एक प्रशासनिक/Administrative पद होता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पटवारी को लेखपाल भी कहा जाता है। हमारे देश में अलग-अलग स्थानों पर कुछ और भी अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। 

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पटवारी के प्रमुख कार्य/Duty of Patwari 
पटवारी ग्राम स्तर पर एक सरकारी कर्मचारी होता है, जिसके क्षेत्र में एक या एक से अधिक गांव आते है। शहर का एरिया/जमीन भी इन्ही के अधीन आता है। पटवारी इन गाँव ओर शहर की सम्पूर्ण भूमि का विवरण रखते है। जैसे – गाँव में टोटल कितनी जमीन है, कितनी उपजाऊ है, एक किसान के पास कितनी भूमि है, इस पर लगान/माल क्या है व भूमि किस किस्म की है, इत्यादि सभी जानकारी पटवारी रखता है। निचे दी गई लिस्ट में पटवारी के सभी कार्य समायोजित किये गए हैं। 
  1. पटवारी भू और राजस्व अभिलेखों को अपडेट रखता है। 
  2. किसी भूमि का क्रय विक्रय पटवारी/लेखपाल की सहायता द्वारा ही संपन्न होता है। 
  3. पटवारी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक खेतो या अन्य जमीं के हस्तांतरण का कार्य करता है।
  4. पटवारी भूमि का आवंटन करता है। 
  5. पटवारी आपदाओ के दौरान, आपदा प्रबंधन अभियानों में सक्रिय रूप से अपना सहयोग देता है। 
  6. पटवारी विभिन्न राष्ट्रीय कार्यकर्मो में भी सहयोग के साथ साथ कृषि गणना, पशु गणना, तथा अन्य सरकारी आर्थिक सर्वेक्षण में सहयोग देते है। 
  7. विकलांग, वृद्धवस्था पेंशन, आय व् जाति प्रमाण पत्र बनवाने में पटवारी का अहम् योगदान होता है। 


पटवारी पद के लिए शैक्षिक योग्यता/Education Qualification For Patwari Post
इस पद के लिए आवेदन करने हेतु उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त विश्विद्यालय से कम से कम 12 वीं कक्षा/इंटरमीडिएट में उत्तीर्ण  करना अनिवार्य होता है। अतः उम्मीवार 12 वीं/इंटरमीडिएट के बाद ही पटवारी पद के लिए आवेदन कर सकता है।  आजकल साथ में उम्मीदवार को कंप्यूटर की बेसिक/सामान्य  जानकारी होनी अत्यंत आवश्यक है। 

पटवारी पद के लिए आयु सिमा/Age Limit for Patwari
पटवारी पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा अधिकतम आयु 38-42 वर्ष होनी चाहिए। विभिन वर्गों के अनुसार आयु सिमा में आवेदनकर्ता को छूट दी जाती है। 


पटवारी का मासिक वेतन कितनाहोता है? 
ये सवाल अक्सर सभी के दिमाग में आता है की आखिर पटवारी की तनख्वाह/वेतन कितना होता होगा। आइये हम आपको बताते हैं। पटवारी पद पर कार्यरत उम्मीदवार का वेतन 25,000 से 40,000 रूपये प्रति माह होती है। 

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Tuesday, June 18, 2019

KYC क्या होता है? What is KYC? KYC full form and full detail in Hindi.

दोस्तो नमस्कार हमारे वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है, हम अपने इस वेब पोर्टल पर Technology ओर Education से संबंधित आर्टिकल लिखते है। आज के इस लेख में हम आपके लिए लेकर आये हैं KYC क्या होता है? से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी। कृपया इसे पूरा पढ़ें, साथ ही अन्य जानकारी के लिए आप हमारी दूसरी पोस्ट भी पढ़ सकते हैं।

आजकल पैसे के किसी भी लेनदेन के लिए जहाँ कहीं भी हम जाते है जैसे बैंक आदि में तो हमे अपने जरुरी दस्तवेजों की मदद से KYC प्रक्रिया पूरी करनी होती है। साथ ही मोबाइल से जितनी भी वित्तीय एप्लीकेशन है उनके लिए भी KYC करवाना पड़ता है। आज इसी विषय को आगे बढ़ाते हुए KYC की Full Form, इसके उपयोग, महत्व, और आवेदन हेतु जरूरी डाक्यूमेंट्स कोन-कोन से होते हैं। साथ ही ये भी जानेंगे की KYC कितने प्रकार से होती है, इसी पर पूरा आर्टिकल रहेगा।


KYC full form and full detail in Hindi.

साधारण शब्दों में जाने KYC क्या है?
आज जनता के लिये वित्त/पैसे से सम्बंधित किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिये KYC प्रक्रिया पूरी करवाना जरुरी हो गया है। साधारण शब्दों में हम कह सकते है कि जब हम अपनी पहचान किसी भी संसथान/बैंक या अन्य किसी भी जगह अपने स्थाई कागजातों के माध्यम से वेरीफाई/पुष्टि कराते है, तो हम इसे ही KYC कहते है।

किसी भी प्रकार की वित्तीय संस्था/बैंक और अन्य वित्तीय कम्पनियाँ आज के समय में कोई भी आपके साथ लेनदेन करने से पहले KYC के माध्यम से आपके स्थाई ठिकाने की पुष्टि होने पर ही आपसे व्यवहार को आगे बढ़ाते हैं। इसी प्रक्रिया का नाम KYC है। 



KYC का Full Form क्या होता है?
KYC को हम अंग्रेज़ी  भाषा में Know Your Customer कहते है, तथा हिंदी भाषा में इसका अर्थ बनता है कि "अपने ग्राहक को पहचानना या ग्राहक की पहचान पुष्टि"। 

आइये जाने हम KYC कहाँ-कहाँ उपयोग करते है?
आज के समय अगर आपको किसी भी बैंक में कोई खाता खुलवाना हो, फिक्स्ड डिपाजिट/FD कराना हो, जीवन बीमा से सम्बंधित कोई भी लेनदेन हो या फिर Online Mutual Fund में आपको कहीं पैसा इन्वेस्ट करना हो, या फिर बैंक लॉकर्स लेना हो जैसी अन्य सभी प्रक्रियाओं में, बैंक या कंपनी के कर्मचारी कस्टमर/ग्राहक से उनका KYC मांगते है, या वो हमें KYC प्रक्रिया पूरी करने को कहते हैं। कई बार जब हमारा बैंक का खाता कई दिन तक प्रयोग न करने पर बंद/निश्क्रिय हो जाता है, तो उसे फिर से चालू करवाने की प्रक्रिया में भी बैंक हमसे सबसे पहले KYC के लिए दस्तावेज मांगता है। RBI/भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा सभी बैंकों की अपनी सुरक्षा के लिये ग्राहकों से KYC फॉर्म भरवाना अनिवार्य कर दिया गया है।

आजकल लगभग हर कोई मोबाइल फोन में विभिन बैंकों की एप्लीकेशन को प्रयोग करता है, या फिर वो बहुत सी Open Source एप्लीकेशन प्रयोग करता है जैसे PayTm, Google Pay, Zomato, Mobiquick , Pay, Bhim  App इत्यादि और भी बहुत सारी हैं जिनके प्रयोग करने से पहले आपको किसी न किसी माध्यम से KYC करवाना ही पड़ता है।  

एक और अन्य साधारण से उद्धरण के माध्यम से आपको समझा देता हूँ की जब भी हम कोई नया सिम कार्ड लेना चाहते है, तो हमें अपनी पहचान के लिये हमारा आधार कार्ड से वेरीफाई/पुष्टि कराना होता है, पुष्टि पूरी होने के बाद ही हमारे सिम कार्ड एक्टिवेट होता है। यह भी एक प्रकार की KYC प्रक्रिया ही है। 


KYC का महत्व क्या है?
इसका महत्तव हम दोनों के लिए होता है बैंकों या अन्य वित्तीय सस्थानों के लिए भी। आज हर जगह KYC प्रक्रिया का महत्वपूर्ण स्थान है क्यूँकि दस्तावेजों के आधार पर समाज में रहने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि की जाती है। इस  वयक्ति की पहचान की पुष्टि पूरी हो जाने से किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से वित्तीय कंपनी या बैंक दोनों को बचाया जा सकता है।



KYC का आवेदन पत्र प्रारूप। KYC Form कैसा होता है?
KYC के लिए फॉर्म हर संस्थान/बैंक या कंपनी में अलग अलग होते है, पर इन सभी में कुछ समानताएं होती है जो निचे दी गई हैं। 

  1. हर KYC फॉर्म में हमें एक पासपोर्ट आकार की फोटो लगानी होती है।
  2. इसमें आपको अपनी जन्म तिथि भी भरनी पड़ती है।
  3. उक्त बैंक या कंपनी से संबंधित खाता संख्या भरना होता है।
  4. आपको अपना पेन-कार्ड का क्रमांक/नंबर भरना पड़ता है।
  5. आपको अपना और आपके पिताजी का नाम भरना पड़ता है। 
  6. इसमें आपको आपका स्थाई फ़ोन नम्बर/मोबाइल नम्बर जो भी आप वर्तमान में उपयोग कर रहे है उसको भरना पड़ता है।
  7. ग्राहक को अपने घर का स्थाई पता भरना पड़ता है जो कि आधार कार्ड/राशन कार्ड में दिया गया हो।
  8. अगर आप कोई E-Mail ID उपयोग करते है तो फॉर्म में लिखना होगा।
  9. इस KYC फार्म के साथ आप कोन-कोन सी ID लगा रहे हैं, ये सभी आपको इस फॉर्म में बताना होगा या दी गई जगह पर निशान लगाना होगा।
  10. इसमें आपको सबसे निचे अपने हस्ताक्षर करने होते हैं। हस्ताक्षर दो या तीन जगह भी हो सकते हैं। 


KYC प्रक्रिया के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट/दस्तावेज।
KYC प्रक्रिया के लिए आपको पहचान हेतु इनमे से किसी भी ID की जरुरत होती है जैसे - आधार कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि लगा सकते हैं। इन सभी का महत्व इसलिए हैं क्यूंकि इन सभी पर आपके घर या ठिकाने का स्थाई पता लिखा होता है। वैसे पैन-कार्ड भी आपका परिचय पत्र होता है लेकिन उसमे आपका एक स्थाई पता नहीं लिखा होता है। इसलिए आपका पैन-कार्ड अन्य दस्तवेजों के साथ ही मान्य होता है। साथ ही इसके लिए आपको पासपोर्ट आकार के ताज़ा फोटो की भी जरुरत होती है, जो आपने हाल ही में बनवाई हो। उक्त सभी दस्तावेज ही आपकी KYC है। 


 KYC full form and full detail in Hindi.



आइये अब जान लेते हैं की KYC कितने प्रकार से होती है?
KYC दो प्रकार से की जाती है, या दो प्रकार की होती है EKYC और CKYC . 

EKYC क्या होता है?
EKYC एक ओटीपी/OTP  पिन के आधार पर काम करता है।  प्रक्रिया में आप घर बैठे ही बिना किसी Biometric Device की सहायता के अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं। ज्यादातर Online Service/ऑनलाइन सर्विस में इसी सुविधा का प्रयोग किया जाता है।  EKYC के लिए आपको अपनी पहचान साबित करने के लिए अलग-अलग तरह के विभिन्न दस्तावेज इकठ्ठा करने की जरुरत नहीं होती। आजकल आपका काम सिर्फ आधार-कार्ड से ही चल जाता है। अगर आपको आधार नंबर याद है तो आपको आधार-कार्ड साथ रखने की आवश्यकता भी नहीं होती।  । 

CKYC क्या होता है?
CKYCका मतलब होता है Central/सेंट्रल KYC इसको भारत सरकार ने जुलाई 2015 में प्रस्ताव पास कर पारित किया था और 1 फरवरी 2017 से इसे लागू किया गया है। CKYC से हमें कुछ लाभ भी मिलते है जैसे अगर आपने कोई जीवन बीमा लिया है और आपने अपना CKYC भरकर दे दिया हो, तब आपको उनकी तरफ से एक 14 नम्बर का एक KIN नम्बर मिलेगा। जब कभी भी आप बैंक में अपना कोई खाता खोलना चाहते है या फिर आप Mutual Fund में पैसे लगाना चाहते है तो आपको केवल वो KIN नम्बर ही उस फॉर्म में भरना पड़ेगा। इसके बाद आपको दोबारा से KYC नहीं करवाना पड़ेगा। CKYC सर्वर आपकी सारी जानकारी को अपने अंदर सुरक्षित कर लेता है।



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