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Saturday, March 9, 2019

क्या है 13 पॉइंट और 200 पॉइंट रोस्टर, और दोनों में क्या फर्क है? What is 13 points and 200 points roster system?

आज के इस लेख में हम जानेंगे की रोस्टर/Roster सिस्टम क्या है, क्यों इसमें बदलाव किया जा रहा है। साथ ही इस समय किस आधार पर विभिन्न वर्गों को यह आरक्षण दिया जाये इस पर भी विवाद चल रहा है। आइये इस लेख में इसकी पूरी जानकरी आपके साथ शेयर करते हैं।
क्या है 13 पॉइंट और 200 पॉइंट रोस्टर,

भारत में UGC/UNIVERSITY GRANT COMMISSION की वेबसाइट के अनुसार 18 फरवरी,2019 तक भारत में कुल Universities/विश्विधालय की संख्या 903 थी, जिसमें केंद्रीय यूनिवर्सिटीज 48, स्टेट यूनिवर्सिटीज 399, प्राइवेट यूनिवर्सिटीज 330 और डीम्ड प्राइवेट यूनिवर्सिटीज 126 थीं। इन यूनिवर्सिटीज में भारत सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार समाज के विभिन्न वर्गों को नोकरी में आरक्षण भी दिया जाता है।


आइये जान लें रोस्टर क्या होता है? What is Roster?
Roster/रोस्टर, इसे विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे कि शिफ्ट चार्ट/Shift Charge, ड्यूटी चार्ट/Duty Charge  इत्यादि। ये किसी भी यूनिवर्सिटीज/University में वैकेंसी जारी करने का एक तरीका होता है, जिससे यह निर्धारित किया जाता है की किस विभाग में निकलने वाली नोकरी किस वर्ग (जनरल, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति या जनजाति) को मिलेगी।  

आइये जान ले पहले क्या नियम था और अब क्या बदलाव किया है।
पहले जब देश में 200 पॉइंट रोस्टर लागू था तब यूनिवर्सिटी को एक इकाई माना जाता था। पूरी यूनिवर्सिटी में जिनती भर्तियां निकलती थीं, उनको पहले से तय आरक्षण के आधार पर विभिन्न कैटेगरी में बांटा जाता था। लेकिन बाद में यूजीसी ने आरक्षण बाँटने का नियम 200 पॉइंट रोस्टर के स्थान पर 13 प्वाइंट रोस्टर कर दिया था। यूजीसी के इस नियम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी। बस तभी से इसके ऊपर विवाद शुरू हुआ।

पिछला 200 पॉइंट रोस्टर सिस्टम क्या था?
देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की भर्ती 200 पॉइंट रोस्टर के तहत की जाती थी। ये सिस्टम साल 2007 में लागू हुआ था, जब उच्च शिक्षा में OBC आरक्षण लागू हुआ था। इस सिस्टम के तहत पूरे विश्वविद्यालय को एक यूनिट माना जाता था, और फिर सीटों को विभिन्न कैटेगरी में बांटा जाता था। इस सिस्टम के 200 होने के पीछे का कारण 7.5% ST आरक्षण को 15% के राउंड फिगर में करने के लिए बेस को 100 से दोगुना करके 200 किया गया था। यानि की आनुपातिक आधार पर प्रत्येक 14 वां पद ST को जाने से 200 पदों में से 7.5% आरक्षण ST को मिल जाये इस हिसाब से इसे बनाया गया था। इसी प्रकार प्रत्येक 7वां पद SC को मिलेगा जिससे 200 पद होने से SC को निर्धारित 15% आरक्षण मिल जायेगा और प्रत्येक चौथा पद OBC को दिया जायेगा जिससे 200 सीटों में से 27% पद OBC को मिल जायेंगे। इस सिस्टम में केवल 3 सीटें होने पर कोई आरक्षण नहीं दिया जाता है। इसे आप इस तरह समझिए कि इस सिस्टम में अगर कैटिगरी के हिसाब से पदों का विभाजन करना हो तो संख्या 200 तक जाएगी। इसके बाद यह फिर से 1,2,3,4 संख्या से शुरू हो जाएगी। अर्थात अब जब आंकड़ा 200 तक जाएगा तो ज़ाहिर है कि इसमें आरक्षित वर्ग (ओबीसी, एससी, एसटी) के लिए पद ज़रूर आयेंगे।

क्या है 13 पॉइंट और 200 पॉइंट रोस्टर,

अब जान लेते हैं कि 13 पॉइंट रोस्टर सिस्टम क्या है?
13 पॉइंट रोस्टर एक ऐसा सिस्टम है जिसमें 13 नियुक्तियों को क्रमबध तरीके से दर्ज किया जाता है। इसमें विश्वविद्यालय को एक इकाई/Unit न मानकर विभाग को इकाई माना जाता है। यानी इस व्यस्था के तहत शिक्षकों के कुल पदों की गणना विश्वविद्यालय या कॉलेज के अनुसार न करके विभाग या विषय के हिसाब से की जाती है।
इसे हम इस तरहसे से समझ लेते हैं। मान लीजिए कि किसी विभाग में 4 वेकेंसी निकली हैं तो उसमें से पहली तीन वेकेंसी जनरल/General  वर्ग के लिए होंगी, जबकि चौथी वेकेंसी ओबीसी/OBC वर्ग के लिए होगी। इसके बाद जब अगली वेकेंसी आएंगी तो वो 5 से काउंट होंगी। यानी पांचवी और छठी वेकेंसी अनारक्षित वर्ग के लिए तो सातवीं अनुसूचित जाति के लिए होगी। इसी तरह फिर आठवीं, नौवीं और दसवीं वेकेंसी अनारक्षित/Unreserved  सामान्य वर्ग/General के लिए तो 12वीं वेकेंसी ओबीसी के लिए। यह क्रम 13 तक ही चलेगा और 13 के बाद फिर से 1 नंबर से शुरू हो जाएगा। अर्थात इस सिस्टम में OBC, SC और ST के लिए सीटें कम या लगभग ख़त्म ही हो जाती हैं।

13 पॉइंट रोस्टर सिस्टम का विरोध क्यों किया गया?
जैसा कि हम सभी के समक्ष हैं कि विश्वविद्यालयों के डिपार्टमेंट में वेकेंसी बहुत कम संख्या (अधिकतर 5 या 7) में निकलतीं हैं, इस स्थिति में पिछड़ा वर्ग, SC और ST के लिए विश्वविद्यालयों में नौकरी पाना असंभव ही हो जायेगा। जबकि इस तरह की समस्या 200 पॉइंट रोस्टर सिस्टम के समय नहीं आती थी, और 50% आरक्षण भी विभिन्न वर्गों को मिल जाता था।


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