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Sunday, December 1, 2019

भारतीय संविधान का संक्षिप्त इतिहास और रोचक तथ्य।

हमारा देश भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। आजादी के कुछ सालों बाद तक हमारे देश में संविधान नाम की कोई चीज नही थी, बस वही अंग्रेजों के बनाये नियम पर देश चल रहा था। किसी भी देश का संविधान उसकी राजनीतिक व्यवस्था का ताना-बाना होता है, उस देश का विकास राजनीतिक संदर्भ में अच्छे संविधान की बुनियाद पर ही खड़ा होता है। किसी भी देश के संविधान के तहत ही उस देश की जनता शासित होती है। यह अपने देश में राज्य की विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका जैसे प्रमुख अंगों की स्थापना करता है, उसकी शक्तियों की विस्तृत व्याख्या करता है, उनके द्वारा प्रदत्त दायित्वों का सीमांकन करता है और उनके पारस्परिक तथा जनता के साथ आंतरिक ओर बाह्य संबंधों का विवेचन करता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि किसी भी देश के संविधान को हम उसका आधार या संरचना कह सकते हैं। संविधान संरचना को ही उस राष्ट्र की आधार विधि या मूलभूत कानून कहा जा सकता है, जो जनता के लिए देश को अग्रसर करने के लिए बनाया गया होता है। संविधान उस राष्ट्र की राजव्यवस्था/शाशनव्यस्था के मूल सिद्धातों को निर्धारित करती है। 
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हर देश का संविधान उसके संस्थापकों एवं निर्माताओं या उस पूरे समूह के आदर्शों, सपनों तथा मूल्यों का प्रतिबिम्ब होता है। संविधान जनता के लिए राष्ट्र के निर्माण के लिए की जाने वाली विशिष्ट सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक प्रकृति, आस्था एवं आकांक्षाओं/महत्वकांक्षाओं पर आधारित होता है।




हमारे संविधान का इतिहास।  
आजादी से कुछ सालों पहले हमारे देश मे बढ़ रही जागरूकता ओर देशप्रेम की अगाध ज्वाला को देखते हुए साल 1946 में अंग्रेजों ने भारत को आज़ाद करने पर गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया था। लेकिन जाने से पहले कुछ अंग्रेज शाशक हमारे देश को कुछ ऐसा देना चाहते थे जिससे इस देह की राजनीतिक गतिविधियों में बदलाव के साथ आगे आने वाले समय मे देश में एक संपूर्ण लोकतांत्रिक व्यस्था बनी रहे। इसी सोच के चलते अंग्रेजों ने भारतीय संविधान का प्रारूप तैयार करने व एक संविधान सभा स्थापित करने की संभावना पर चर्चा करने के लिए, अंग्रेजी सरकार और भारत के विभिन राज्यों के प्रतिनिधियों से एक साथ मिलने की योजना पर अमल शुरू किया गया। 
कैसे गठित हुआ हमारा संविधान?
जैसा कि हम ऊपर जिक्र कर चुके है कि साल 1946 में संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के तहत किया गया था। उस वक़्त डॉ राजेंद्र प्रसाद इसके स्थायी अध्यक्ष और डॉ. भीम राव अम्बेडकर जी को प्रारूप समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। संविधान की प्रारूप रिपोर्ट तैयार करने के लिए इसमे13 समितियों की स्थापना की गई थी। भारतीय संविधान सभा में उस वक़्त 389 सदस्य थे, इनमें प्रारंभिक विश्लेषित विवरण में मौजूदा राज्य के 292 प्रतिनिधि, असंगठित देशी रियासतों के 93 प्रतिनिधि, मुख्य आयुक्त क्षेत्रों के 3 प्रतिनिधि तथा बलूचिस्तान का 1 प्रतिनिधि शामिल किया गया था। बाद में इस सभा में मुस्लिम लोगों की संख्या कम होने के कारण 299 प्रतिनिधि ही शेष रह गए थे। जनवरी 1948 में भारतीय संविधान का पहला प्रारूप विचार-विमर्श के लिए पेश किया गया था। इसके बाद इस पेशकश पर 32 दिनों तक विचार-विमर्श जारी रहा था। इस अवधि के दौरान इसमे 7635 संशोधन प्रस्तावित किए गए थे और उनमें से 2473 पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई थी। भारतीय संविधान निर्माण की प्रक्रिया में कुल 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे थे। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के 284 सदस्यों द्वारा भारत के संविधान पर देश की एकता,अखंडता, ओर देश के विकाश के लिए हस्ताक्षर किए गए थे, इन हस्ताक्षर करने वालो लोगों में 15 महिलाएं भी शामिल थीं। 
इसे बनाने में गठित सभा द्वारा प्रदत्त सहयोग के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूरे देश मे लागू कर दिया गया जो अब तक विभिन संसाधनों के बाद देश की राजनीतिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाये हुए है।



रोचक तथ्य हमारे संविधान के बारे में।
भारतवर्ष का संविधान दुनिया का सबसे दीर्घ और सबसे विस्तृत संविधान है, इसमें 25 भाग, 448 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं तथा मूल संविधान में 395 अनुच्छेद और 9 अनुसूचियाँ सम्मिलित हैं। भारत के संविधान को संस्कृति, धर्म और भूगोलिकता के दृष्टिकोण से सबसे अच्छा लिखित संविधान माना गया है। 


डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने स्पष्ट किया कि भारत एक संघ है और किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का कोई अधिकार नहीं है। भारतीय संविधान के पहले अनुच्छेद के अनुसार, "भारत" राज्यों का संघ है। जिस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था, तब एक तर्क सामने आया था कि क्या भारत एक संघ है या एक महासंघ! डॉ भीम राव अंबेडकर ने प्रारूप तैयार करने के चरण में, भारत को मजबूत एकतावादी बनाने के लिए इसे महासंघ कहा था।साथ ही "सहयोगी संघवाद" शब्द भी जल्द ही लोकप्रिय हो गया था, जिसमें राज्यों और केंद्रों की दोहरी राजनीति के बारे में बात की गई थी।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना है कि भारत एक सर्वश्रेष्ठ समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है। "समाजवादी" शब्द संविधान के 42वें  संशोधन अधिनियम 1976 के माध्यम से, 1976 के बाद सम्मिलित किया गया था।


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भारत के मूल संविधान को हिंदी और अंग्रेजी में *प्रेम बिहारी नारायण रायजादा* द्वारा लिखा गया था। संविधान के प्रत्येक पृष्ठ को जटिल लेख और इटैलिक धाराप्रवाह में लिखा गया था। पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन के कलाकारों ने प्रत्येक पृष्ठ के प्रस्तुतीकरण पर भी कार्य किया था। इसकी अंग्रेजी और हिंदी की मूल प्रतियाँ भारतीय संसद पुस्तकालय में, हीलियम से डिजाइन किए गए विशेष पात्र में संरक्षित हैं।

भारतीय संविधान में नीचे दिए गए दूसरे देशों के संविधानों विभिन्न मुद्दों पर अभिप्रेरणा ली गई है। 

1. फ्रांस : भारत के संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता तथा भाईचारे के आदर्शों को शामिल किया गया है। यह प्रेरणा फ्रेंच क्रांति से ली गई थी, जिसका गठन पहली बार फ्रांस में हुआ था।
2. ऑस्ट्रेलिया : समवर्ती सूची को यहीं से लिया गया।
3. ग्रेट ब्रिटेन : भारतीय संसदीय प्रणाली, ब्रिटिश संसदीय प्रणाली की संरचना लगभग एक जैसी ही है। इसमें कानून बनाने की प्रक्रियाएं, कानूनी नियम और एकल नागरिकता के सिद्धांतों की प्रेरणा ब्रिटिश संविधान से ली गई हैं।
4. संयुक्त राज्य अमेरिका : भारतीय संविधान की प्रस्तावना "हम लोग" के साथ शुरू हुई है और इसकी प्रेरणा अमेरिकी संविधान की प्रस्तावना से ली गई थी। भारत के मूलभूत अधिकार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक समीक्षा प्रणाली, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानान्तरण भी अमेरिका के संविधान का प्रतिपालन करता है।
5. कनाडा : संघीय ढाँचे में मजबूत केन्द्रीय सत्ता की अभिप्रेरणा
6. जर्मनी (वाइमर गणराज्य) : आपातकाल की अभिप्रेरणा
7. आयरलैण्ड गणराज्य : राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत।
8. यूएसएसआर : पंचवर्षीय योजनाओं की अभिप्रेरणा

भारतीय संविधान का एक तथ्य यह भी है कि आज तक केवल इसमें 101 संशोधन हुए हैं, जो संविधान सभा द्वारा लिखित अपने विचारों की व्यापक प्रकृति को दर्शाते हैं।



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