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वास्तु निर्माण के कुछ सामान्य नियम।

दोस्तों वास्तु से सम्बंधित हमारे सभी पोस्ट आप लोगों द्वारा बहुत ही पसंद किया जा रहे हैं, इसलिए मैं वास्तु से सम्बंधित कुछ और सामान्य नियम के बारे में आज आपको इस पोस्ट में बताऊंगा। कृपया पोस्ट को पूरा पढ़ें।
वास्तु निर्माण के कुछ सामान्य नियम

क्या हैं वास्तु निर्माण के कुछ सामान्य नियम। 
बेशक आपके घर के किसी भी तरफ सड़क हो, घर निर्माण के कुछ सामान्य नियमों को अपनाकर आप मकान का वास्तु-शास्त्र के अनुसार निर्माण कर सकते है। इस प्रकार के निर्माण से लाभ उठाया जा सकता है। मकान निर्माण के वास्तु अनुसार कुछ सामान्य नियम नीचे दे रहा हूँ इन्हे जरूर पढ़ें।
सामान्य नियम:


  1. घर के उत्तर और पूर्व में ज्यादा खाली जगह तथा दक्षिण और पशिचम में कम खाली जगह छोड़ें ।
  2. घर में कुऑं या बोरिंग उत्तर पूर्व में ही होनी चाहिये । जमीन के अंदर पानी की टंकी होने पर यह भी इस तरफ ही हो ।
  3. पानी की टंकी जमीन के ऊपर होने पर यह दक्षिण पशिचम में मकान के ऊपर ही रखें । मकान में सबसे ऊँचा निर्माण दक्षिण पशिचम में ही होना चहिए ।
  4. सेप्टिक टैंक सिर्फ उत्तर पूर्व के ठीक बीच में ही हो । अन्य किसी दिशा में होने पर दुष्परिणाम होंगे ।
  5. घर में इस्तेमाल किया हुआ और बरसात का पानी नार्थ-ईस्ट से ही बाहर जाना चाहिये । ऐसा न हो सकने पर सारा पानी नार्थ-ईस्ट में जमा करके फिर किसी भी दिशा (साउथ-वेस्ट को छोड़कर) से बाहर निकाल सकते हैं ।
  6. ईस्ट और नार्थ की ओर बड़े पेड़, बड़ी इमारतें या पहाड़ नहीं होने चाहिये, यह सिर्फ वेस्ट और साउथ में ही होने चाहिए ।
  7. घर के मध्य भाग को ब्रह्मस्थान कहते हैं । इस स्थान पर किसी तरह का निर्माण जैसे दीवार, सीढ़ी, गड्ढा नहीं होना चाहिए ।
  8. ढाल बरामदा रखने पर यह ईस्ट या नार्थ की तरफ ही हो किसी भी हालत में वेस्ट और साउथ में नहीं होने चहिए ।
  9. घर की छत पर दूसरी मंजिल बनाने पर वह सिर्फ साउथ और वेस्ट की तरफ ही बनाएं या पूरी छत पर निर्माण होना चाहिये ।
  10. चबूतरा बनवाना हो तो यह सिर्फ साउथ और वेस्ट दिशाओं में ही हो क्योंकि यह निर्माण मकान के फर्श से उँचा होगा ।
  11. चारदीवारी होन पर उसकी उंचाई ईस्ट और नार्थ में कम तथा वेस्ट और साउथ में ज्यादा हो ।
  12. मकान की दीवारें सदैव सीधी होनी चाहिऐ ।
  13. घर की चारदीवारी के किसी कोने पर निर्माण करना अनिवार्य हो तो पूरी चारदीवारी पर ही निर्माण करें । साथ ही घर की दीवार से हटकर कमरों का निर्माण करें ।
  14. इस्ट और नार्थ में सड़क होने पर यह मकान के नीचे तल में ही हो ।
  15. जगह के ईस्ट तथा नार्थ में तालाब, नाला आदि का होना शुभ है ।
  16. मकान की दीवारें हमेशा सीधी हों ।
  17. रसोई सदैव साउथ-ईस्ट या नर्थ-वेस्ट में ही रखें ।
  18. घर का भारी सामान जैसे अलमारी, स्टोर रूम, पानी की टंकी सदैव साउथ-वेस्ट में ही रखनी चाहिऐ ।
  19. घर के नार्थ-ईस्ट में कम वजन व हल्का सामान रखें ।
  20. विदिशा प्लॉट होने पर नार्थ-ईस्ट को छोड़कर और किसी भी तरफ ढाल बरामदा नहीं होना चाहिए ।
  21. घर व छत के फर्श का ढाल साउथ से नार्थ या वेस्ट से ईस्ट की तरफ हो तो निवासी सुखी रहेंगे ।
  22. मकान मालिक के सोने का कमरा साउथ-वेस्ट में तथा बच्चों का कमरा नार्थ-वेस्ट में शुभ है ।
  23. चारदीवारी होने पर, इससे जुड़ते हुए किसी भी तरह का निर्माण न करें । चारदीवारी के अन्दर चारों तरफ खाली जगह छोड़कर ही मकान का निर्माण करें ।
  24. ईस्ट, नार्थ, नार्थ-ईस्ट की तरफ मलवा व कूड़ा-करकट इत्यादि न डालें
  25. घर के मुख्य द्वार के सामने नार्थ और ईस्ट में पेड़ नहीं होने चाहिए।
  26. घर का कोई कोना या बॉलकॉनी गोल न बनायें । उसे सीधा रखें तो वास्तु दोष नहीं लगेगा ।
  27. किसी प्लॉट में दिशायें कोनों पर आयें तो ऐसे प्लॉट को विदिशा प्लाट कहा जाता है इस दशा में मकान निर्माण में ऊपर दिये गये सामान्य नियम ही प्रभावी होंगे ।
उपरोक्त वास्तु निर्माण के कुछ सामान्य  नियमों को अपनाकर आप अपने घर के एक अद्वितीय ऊर्जा का अनुभव करेंगे। 


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Comments

  1. Very informative article, which you have shared here about the Vastu. After reading your article I got very much information and it is very useful for us. House vastu

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