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Sunday, February 17, 2019

धारा 370 क्या है, इसे जम्मू-कश्मीर राज्य में लगाने के पीछे क्या कारण है? Article 370 in Jamm & kashmir.

हमारा भारत काश्मीर से कन्याकुमारी तक एक है, यह सुनने में तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन कहीं न कहीं इसमे कुछ खोट है, माना की ये खोट हमारे दिल मे नही है। कुछ ऐसी बाते हैं जो हमारी होते हुए भी हमारी नहीं है। जैसे बात हम कश्मीर राज्य की करें तो, देखने को तो ये हमारे देश का अभिन्न अंग हैं, लेकिन अगर वहां की आधी से ज्यादा आवाम की बात की जाए तो वो हमें अपना नही मानते। पता नही इसके पीछे क्या कारण रहे होगें। चलिए आज मैं आपको जम्मू-कश्मीर राज्य में लगी धारा 370 के बारे में पूरी जानकारी जरूर दूंगा।

धारा 370 क्या है, इसे जम्मू-कश्मीर राज्य में लगाने के पीछे क्या कारण है? Article 370 in Jamm & kashmir.

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क्या है धारा 370?
भारतीय संविधान की धारा 370 जम्मू-कश्मीर राज्य को भारत के अन्य राज्यों की तुलना में विशेष दर्जा प्रदान करती है। धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य को कई अधिकार दिए गए है। जहां एक तरफ कहने को तो पूरा भारत एक है, यहां का कानून एक है, लेकिन भारत के एक हिस्से ने न तो भारत के कानून को अब तक अपनाया है, ओर न ही भारत की सियासत को, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है धारा 370। इस धारा को जम्मू-कश्मीर राज्य में कब और किन परिस्थितियों में लगाना पड़ा था, चलिए जान लेते हैं।

जम्मू-कश्मीर कैसे हुआ भारत में विलय?
15 अगस्त1947 को हमारा देश आजाद हुआ था, तब हमारे देश मे अनेक रियासते थी जो राजाओं के अधीन थी।उस वक़्त भारत के पहले गृहमंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल ने भारत की छोटी-बड़ी लगभग 562 रियासतों को एकत्रित कर लिया, सिर्फ जम्मू और कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ की रियासत को छोड़कर। स्वतंत्रता के समय जम्मू-कश्मीर भारत के गणराज्य में शामिल नहीं था, लेकिन उसके सामने दो विकल्प थे, या तो वह भारत या फिर पाकिस्तान में शामिल हो जाए। उस समय कश्मीर की मुस्लिम बहुल जनसंख्‍या पाकिस्तान से मिलना चाहती थी, लेकिन राज्य के अंतिम महाराजा हरिसिंह का झुकाव भारत के प्रति था। राजा हरिसिंह ने भारत के गणराज्य  में शामिल होने लिए भारत के साथ ''इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन'' नामक दस्तावेज पर हस्‍ताक्षर किए थे। जम्मू-कश्मीर के राजा हरिसिंह जम्मू-कश्मीर राज्य को स्वतंत्र ही रखना चाहते थे। इसी दौरान वहां के पाकिस्तान समर्थित कबिलाइयों ने आक्रमण कर दिया, जिसके बाद राजा हरिसिंह ने जम्मू-कश्मीर राज्य को भारत में विलय के लिए अपनी सहमति दी। इसके बाद भारतीय संविधान की धारा 370 के तहत जम्मू कश्मीर को एक विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था। उस समय की आपातकालीन स्थिति को देखते हुए कश्मीर का भारत में विलय करने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करने का समय नहीं था। इसलिए संघीय संविधान सभा में गोपालस्वामी आयंगर ने धारा 306-ए का प्रारूप पेश किया। बाद में इसे ही धारा 370 का नाम दिया गया, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिले हैं।1951 में राज्य की संविधान सभा को अलग से बुलाने की अनुमति दी गई तथा नवंबर 1956 में राज्य के संविधान का कार्य पूरा हुआ। 26 जनवरी 1957 को राज्य में विशेष संविधान लागू कर दिया गया जो आज तक चला आ रहा है।

आइये जान लेते है कोनसे अधिकार हैं जम्मू-कश्मीर राज्य के पास। 
  • जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय करना उस वक्त की बड़ी जरूरत थी। इस कार्य को पूरा करने के लिए जम्मू-कश्मीर की जनता को उस समय धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार दिए गए थे। इसी की वजह से यह राज्य भारत के अन्य राज्यों से अलग है।
  • धारा 370 के प्रावधानों के मुताबिक संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का ही अधिकार है।
  • किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की सहमति लेने की जरूरत पड़ती है।
  • इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती। राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।
  • 1976 का शहरी भूमि कानून भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
  • भारत के अन्य राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। धारा 370 के तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार है।
  • भारतीय संविधान की धारा 360 यानी देश में वित्तीय आपातकाल लगाने वाला प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता। 


कैसे अलग है जम्मू-कश्मीर राज्य का कानून हमसे !
  1. जम्मू-कश्मीर का अपना एक अलग झंडा और प्रतीक चिन्ह भी है।
  2. जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है।
  3. जम्मू-कश्मीर में भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं है। यहां भारत की सर्वोच्च भारतीय अदालत के कोई आदेश मान्य नहीं होते।
  4. जम्मू-कश्मीर में पंचायत के पास कोई अधिकार नहीं है। 
  5. जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाएगी।
  6. यदि कोई कश्मीरी महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी करती है, तो उसके पति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है।
  7. धारा 370 के कारण कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है।
  8. जम्मू-कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं।
  9. जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल होता है। जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 साल होता है।
  10. भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के संबंध में बहुत ही सीमित दायरे में कानून बना सकती है।
  11. जम्मू-कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है।
  12. धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में सूचना का अधिकार (आरटीआई) लागू नहीं होता। 
  13. जम्मू-कश्मीर में शिक्षा का अधिकार लागू नहीं होता है। यहां सीएजी (CAG) भी लागू नहीं है।
  14. जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले चपरासी को आज भी अढाई हजार रूपये ही बतौर वेतन मिलते हैं।
  15. कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दूओं और सिखों को 16 फीसदी आरक्षण नहीं मिलता है।


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