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निसार परियोजना क्या है? What is NISAR Mission?

अभी हाल ही के दिनों में भारत और अमेरिका ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इसी कारण अमेरिका भारत के साथ इस क्षेत्र में मिल कर कार्य करना चाहता है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो/ISRO/Indian Space Research Origination और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा/NASA/National Aeronautical Space Administration ने मिलकर अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिये और उन्नत सेंसर के विकास पर काम करने हेतु एक परियोजना को साथ मिलकर काम करने का करार किया है। इस परियोजना का नाम है NISAR यानि NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar. दोनो एजेंसियों के बीच हस्ताक्षरित निसार/NISAR परियोजना का उद्देश्य साल 2021 तक पृथ्वी की निगरानी के लिए नए उपग्रह को प्रक्षेपित करना है। दोनों देशों की ये संयुक्त प्रौद्योगिकी चिकित्सा क्षेत्र, अंतरिक्ष, रक्षा और पर्यावरण प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
What is NASA-ISRO SAR Mission/Project


  • दोनों देश मिलकर अब एक नया उपग्रह बनाएंगे जिसका नाम होगा ‘निसार’।
  • निसार का पूरा अर्थ "नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार उपग्रह" है। 
  • यह इसरो और नासा का एक संयुक्त उपक्रम है, इसके 2021 तक बन जाने की उम्मीद है। 
  • इस उपग्रह की उन्नत प्रणाली पृथ्वी की साफ तस्वीरें प्रदान करेगी।
  • इससे पृथ्वी पर होने वाली किसी भी प्रकार की प्राकृतिक घटनाओं की बेहतर जानकारी जुटाइ जा सकेगी।
  • इस उपक्रम का फोकस एल. एंड एस./L&S band बैंड में सेंसर बनाना है। 
  • इस उपग्रह में मौजूद सेंसर्स/Sensor भू-सतह की विकृतियों का अवलोकन करने में तथा आपदा/Disaster के दौरान कार्रवाई के लिये समुद्र के किनारों और उसकी गहराई के विवरण को प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं।
इसके प्रमुख तथ्य। 

  • सैटेलाइट एप्लीकेशन सेंटर/SSC C-Band Radar/रडार इमेजिंग के विकास के साथ-साथ माइक्रोवेव/Microwave और ऑप्टिकल/Optical सेंसर के विकास में अगुवाई करेगा।
  • सैटेलाइट एप्लीकेशन सेंटर गुजरात के अहमदाबाद में स्थित है। 
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन/ISRO विभिन्न उपयोग में आने वाले अवलोकन अध्ययन की बढ़ती मांग को पूरा करने की तैयारी कर रहा है।
  • अंतरिक्ष आधारित निरीक्षण के लाभ को आम जन-मानस के फायदे से जोड़ने के लिये एसएएसी/SSC ने ऑप्टिकल और माइक्रोवेव पेलोड/Payload के एक स्पेक्ट्रम का शुभारंभ किया है।
  • पिछले बिस सालों में ऑप्टिकल अवलोकन क्षमता 35 मीटर से 60 से.मी. तक बढ़ाई गई है, और सेंसर प्रौद्योगिकी विद्युत ट्रांसड्यूसर/Power Transducer से माइक्रोवेव तक दिखने वाले एकीकृत चिप्स में बदल गई है। 
  • फ़िलहाल तक अंतरिक्ष से धरती का अवलोकन करने के लिये 13 उपग्रह अंतरिक्ष की कक्षा में परिचालन में हैं। 
  • SSC ने एक हवाई प्लेटफार्म से उच्च रिजोल्यूशन/Resolution वाले और हाइपर-स्पेक्ट्रल इमेजिंग की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये विशिष्ट एयर-बोर्न इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर का निर्माण किया है। 
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