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Wednesday, January 9, 2019

गरीब स्वर्णों को 10 फीसदी आरक्षण पर संविधान संशोधन, जानिए क्या है स्वर्णो को दिया जाने वाला 10 फीसदी आरक्षण?

जानिए क्या है स्वर्णो को दिया जाने वाला 10 फीसदी आरक्षण !!

आगामी लोकसभा चुनावों से पहले बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने ‘आर्थिक रूप से कमजोर’ तबकों के लिए नौकरियों एवं शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण के फैसले को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार शिक्षा एवं नौकरियों में आर्थिक तौर पर कमजोर वर्गों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान लागू करने से जुड़ा विधेयक लोकसभा में पेश कर सकती है। चूंकि यह संविधान संसोधन विधेयक होगा इसलिए इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी होगा । इसके लिए बीजेपी ने अपने सांसदों को चिट्ठी जारी कर मंगलवार को संसद में मौजूद रहने को कहा है। कांग्रेस ने भी अपने सांसदों को चिट्ठी जारी कर उनसे सोमवार और मंगलवार को संसद में मौजूद रहने को कहा था।  
new reservation bill for general category

सामान्य वर्ग में पिछड़ों को 10 प्रतिशत तक आरक्षण (Reservation) देने के लिए जरूरी संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा (Loksabha) में पेश कर दिया गया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत (Thawar Chand Gehlot) ने 124वां संविधान संशोधन विधेयक सदन के पटल पर रखा।
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विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में लिखा गया है कि अभी तक आर्थिक रूप से कमजोर लोग बड़े पैमाने पर उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश तथा सरकारी नौकरियों से वंचित हैं, क्योंकि वे आर्थिक रूप से मजबूत वर्ग के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते। यदि वे सामाजिक तथा शैक्षिक रूप से पिछड़ेपन के विशेष मानकों को पूरा नहीं करते तो उन्हें संविधान के अनुच्छेद 15 तथा अनुच्छेद 16 के तहत आरक्षण के भी पात्र नहीं माना जाता।

स्वर्णों को 10% आरक्षण, जानें कौन होंगे वो सवर्ण और क्या होंगी शर्तें

इस विधेयक में लिखा है 'यह सुनिश्चित करने के लिए कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उच्च शिक्षा तथा सरकारी नौकरियों में उचित अवसर मिले, संविधान में संशोधन का फैसला किया गया है।' 10 फीसदी आरक्षण सिर्फ उन स्वर्णों को लिए है, जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपये से कम है। जिनके पास पांच एकड़ से कम जमीन है।
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सामान्य वर्गों को 10% आरक्षणःलाभ उठाने के लिए देने होंगे ये जरूरी कागजात तभी आरक्षण के दायरे आएंगे ये स्वर्ण। 

  • सालाना आय 8 लाख से कम होनी चाहिए
  • कृषि योग्य भूमि 5 हेक्टेयर से कम होनी चाहिए
  • घर 1000 स्क्वायर फीट जमीन से कम में होना चाहिए
  • निगम में आवासीय प्लॉट 109 गज  से कम होना चाहिए
  • निगम से बाहर के प्लॉट 209 गज  से कम होने चाहिए

कुछ विचारणीय पहलु : 

  • क्या 8 लाख रूपये सालाना कमाने वाला गरीब माना जायेगा ?
  • क्या 66,666 रूपये महीने आमदन वाला गरीब माना जायेगा ? 
  • अगर सही तरीके से इसका आकलन किया जाये तो सरकार ने महज एक चुनावी दांव खेला है, क्यूंकि आरक्षण की जरुरत उनको है जिनकी महीने की आमदन महज 5 से 8 या 9 हज़ार रूपये हैं, या ये कहें की उनकी सालाना आय महज 60 से 96 हज़ार रूपये तक ही है। अब जो व्यक्ति महीने में 70 हज़ार के करीब कमाता है भला वो गरीब कैसे हो सकता है, बताइये इनको आरक्षण की क्या जरुरत है? 
  • सरकार कहती है की उनकी सालाना आय 8 लाख से कम होनी चाहिए, 8 लाख से कम तो 7,99,999 रूपये भी होती है, अगर कोई साल में 7,99,999 रूपये कमाता है तो भला उसे क्या जरूरत है आरक्षण की ?
  • मुझे ऐसा लगता है की सरकार को इन सभी पहलुओं पर भी संज्ञान लेना चाहिए।  
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संविधान में संशोधन के बाद मिलेगा आरक्षण

10 फीसदी स्वर्ण आरक्षण आर्थिक आधार पर मिलेगा जिसके लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा। संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की व्यवस्था अभी तक नहीं है। आरक्षण को व्यवस्था में लाने के लिए सरकार को संविधान में संशोधन करना पड़ेगा। संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव के बाद ही यह आरक्षण लागू किया जा सकेगा।

वहीं केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र में राज्यसभा की कार्यवाही एक दिन के लिए बढ़ाकर नौ जनवरी तक कर दी। "आर्थिक रूप से पिछड़े" वर्गों के लिए नौकरियों एवं शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण के प्रावधान के लिए प्रस्तावित विधेयक पेश करने की खातिर राज्यसभा की कार्यवाही में एक दिन का विस्तार किया गया है। 

भारत में पहली बार कांग्रेसी पीएम ने किया था सवर्णों को आरक्षण देने का प्रयास। 

1991 में मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया था।  हालांकि, 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया था। बीजेपी ने 2003 में एक मंत्री समूह का गठन किया, हालांकि इसका फायदा नहीं हुआ और वाजपेयी सरकार 2004 का चुनाव हार गई।  साल 2006 में कांग्रेस ने भी एक कमेटी बनाई जिसको आर्थिक रूप से पिछड़े उन वर्गों का अध्ययन करना था जो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के दायरे में नहीं आते हैं लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।  
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