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स्पीकर/Speaker क्या होता है? What is Speaker?

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Speaker full detail, Types of Speaker

स्पीकर क्या होता है? What is Speaker -- in Hindi
स्पीकर इसे शायद सभी लोग जानते होंगे, क्यूंकि स्पीकर का हमारे दैनिक जीवन से बहुत ही अटैचमेंट है। स्पीकर को हम लोग लाउड-स्पीकर, धत्तु रेडिओ आदि नामों से जानते हैं। अब तक हमने स्पीकर को स्पीकर या लाउड स्पीकर के नाम से ही जाना है। हिंदी भाषा में स्पीकर को वक्ता कहते हैं। स्पीकर का काम होता है किसी भी ध्वनि/ऑडियो/Audio को पैदा करना। किसी भी प्रकार के संगीत या अन्य कोई भी ध्वनि सिर्फ स्पीकर ही उत्पन कर सकता है। स्पीकर एक Common Output Device होता है, और इसका मूल काम ध्वनि को पैदा करना होता है। आजकल आपको जगह-जगह शादियों और अन्य ख़ुशी के मौके पर DJ के आगे स्पीकर की आवाज पर लोगों को मस्त होकर नाचते देखा ही होगा। 

स्पीकर और लाउड-स्पीकर का इस्तेमाल पिछले कई सालों से किया जा रहा है, स्पीकर Electric Signals को अपने Structural डिज़ाइन के हिसाब से Sound Wave में परिवर्तित करता है। किसी भी स्पीकर की क्वालिटी उसके साइज पर निर्भर करती है। स्पीकर किसी भी एनॉलॉग/Analog या Electromagnetic Waves को Sound Waves में बदलते हैं। स्पीकर पर किसी अन्य माध्यम से Analog या Digital सिग्नल भेजे जा सकते हैं, जिनको वो परिवर्तित कर आपको सुनाता है। एनालॉग स्पीकर Electromagnetic Waves को Amplify कर साउंड में बदलता है, और डिजिटल स्पीकर को पहले सभी Digital Signals को Analog Signals में बदलना पड़ता है फिर वो ऑडियो आप तक पहुंचाता है। 

किसी भी स्पीकर के द्वारा पैदा होने वाले साउंड को Amplitude या Frequency के द्वारा नापा जाता है। इसमें Frequency के माध्यम से साउंड की पिच को High या Low किया जा सकता है। किसी भी स्पीकर सिस्टम की Ability उसकी साउंड Frequency उत्पन करने की काबिलियत पर निर्भर करती है। साउंड Frequency ही उस ऑडियो की गुणवत्ता को निखरता है। बहुत से स्पीकरों में Multiple Speaker Cones होते हैं जो अलग-अलग Frequency Range के लिए प्रयोग किये जाते हैं। किसी भी Two Way स्पीकर में एक Mid Range स्पीकर और एक Tweeter होता है। Three Way स्पीकर में एक Mid Range स्पीकर, एक Tweeter और एक Sub-woofer शामिल होता है जो साउंड की क्वालिटी को और बेहतर बनाता है।  

साउंड Air Pressure क्या होता है?
जब भी हम किसी भी स्पीकर पर किसी भी प्रकार की ऑडियो की फ्रीक्वेंसी को Low या High करते हैं, इसका मतलब है की हम उस स्पीकर पर साउंड Air Pressure घटा या बढ़ा रहे हैं। Amplitude या Loudness का बदलाव ही साउंड Air Pressure होता है जो की उसके अंदर प्रवाहित हो रहे Sound Waves को निश्चित मात्रा में आप तक पहुंचाता है। यहाँ मैं आपको बता दूँ कि किसी भी ऑडियो माध्यम/Audio Source के द्वारा पैदा किया गया सिग्नल/Signal उतना ज्यादा Powerful नहीं होता। इसे Amplify करने के बाद ही ये सिग्नल Powerful होता है। उदहारण के लिए आपके कंप्यूटर/Computer या मोबाइल/Mobile की Audio Output इतनी Powerful नहीं होती, पहले इनकी Audio को किसी Powerful Amplify सिस्टम से जोड़ना पड़ता है तभी ये मजबूत Signal पैदा कर सकते हैं। इसका मतलब ये है कि इस सिस्टम के माध्यम और Electricity के इस्तेमाल से उन ऑडियो Signals को Amplify किया गया है। 

स्पीकर कितने प्रकार के होते हैं? Types of Speaker
ये जानना भी आपके लिए बहुत ही जरुरी है कि स्पीकर कितने प्रकार के होते हैं। असल में स्पीकर दो प्रकार के होते हैं, एक्टिव स्पीकर/Active Speaker और पैसिव स्पीकर/Passive Speaker. 

एक्टिव स्पीकर/Active Speaker वो स्पीकर होते हैं जो खुद कसी भी साउंड इनपुट को Amplify करने में सक्षम होते हैं। आप इस प्रकार के स्पीकर की पहचान आसानी से कर सकते हैं, इस प्रकार के स्पीकर सिस्टम में एक Volume बटन होता है, जो इसके अंदर लगे साउंड कार्ड की मदद से ऑडियो को कम और ज्यादा कर सकता है। इसके अंदर तार के माध्यम से आप कोई भी ऑडियो सोर्स से Audio Input कर सकते हैं। 

पैसिव स्पीकर/Passive Speaker वो स्पीकर होते हैं जिनके अंदर किसी भी प्रकार की Internal Amplification की सुविधा नहीं होती। ऐसे स्पीकर किसी भी ऑडियो सिग्नल को खुद Amplify नहीं कर सकते, इसलिए इनको हमेशा किसी अन्य Audio Input System की जरुरत होती है जिसके माध्यम से ये High साउंड पैदा करते हैं, यानि सीधे अर्थों में हम ये कह सकते हैं की इनको एक अच्छे Audio Amplifier की जरुरत होती है।  

स्पीकर की श्रेणियां कितनी हैं? Categories ऑफ़ Speakers 
स्पीकर को उनके ड्राइव के हिसाब से श्रेणियों में बांटा गया है, और साथ में उनके कुछ Variables हैं जो इनको श्रेणी के हिसाब से Unique बनाते हैं। इनको पांच श्रेणियों में बांटा गया है, तो आइये जान लेते हैं स्पीकर की सभी श्रेणियों के बारे में।   

1. डायनामिक/Dynamic 
इस श्रेणी के स्पीकर बहुत की सामान्य या Common टाइप के होते हैं। असल में ये Passive Speaker होते हैं। इन स्पीकर में एक या एक से ज्यादा Woofer Driver और Tweeter Driver शामिल होते हैं। इनको Low Frequency साउंड पैदा करने के लिए जाना जाता है। इस तरह के कुछ Professional स्पीकर में Rear Driver भी होते हैं जिनसे साउंड को Amplify किया जा सके।  

2. सब-वूफर/Sub-Woofer 
इस कैटगरी में बड़े Woofer Driver शामिल होते हैं, इनके एन्क्लोज़र में एक Base पोर्ट होता है जो की High Frequency साउंड पैदा करता है। इन स्पीकर्स का इस्तेमाल Base को बढ़ाने/Enhance के लिए किया जाता है। 

3. इलेक्ट्रोस्टेटिक/Electrostatic 
इलेक्ट्रोस्टेटिक/Electrostatic स्पीकर Crisp और Detailed Sound पसंद करने वालों के लिए बहुत ही जबरदस्त Choice होते हैं। ये स्पीकर Diaphragm Feature से युक्त होते हैं, इनमे एक Drive और एक Fine Membrane होती है जिसको दो Conductive पैनल के ऊपर रखा जाता है। इसके लिए किसी अन्य Power Source की जरुरत होती है, यही कारण है की इसे हमेशा किसी दूसरे Power Outlet से कनेक्ट किया जाता है। इस प्रकार के स्पीकर्स को High Frequency Sound के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे स्पीकर्स का इस्तेमाल ज्यादातर Music, Dance, DJ में किया जाता है। 
4. हॉर्न/Horn 
डायनामिक/Dynamic और हॉर्न स्पीकर में बहुत सी समानताएं आपको मिल जाती हैं। इसमें Sound ड्राइवर Arrangement एक Wave Guide Structure के रूप में होता है। इन स्पीकर्स के माध्यम से आप Sound को दूर तक फैला सकते हैं, यानि आप इनकी Relativity High Degree की Sensitivity व साउंड Transmission को एक बहुत ही विस्तृत एरिया तक कर सकते हैं। 

5. प्लानर मैग्नेटिक/Planner Magneti
इस प्रकार के स्पीकर्स में Diaphragm की जगह Planner Magnetic फीचर प्रयुक्त किया जाता है। इसमें एक पतली धातु/Metal की रिबन/Ribbon इस्तेमाल की जाती है। इलेक्ट्रोस्टेटिक/Electrostatic स्पीकर के विपरीत इसमें किसी भी बाहरी Power Source की आवश्यकता नहीं होती। ये स्पीकर बहुत ही High Utility Value की श्रेणी में शामिल होते हैं। अच्छे रख-रखाव के साथ इस प्रकार के स्पीकर को आप काफी लम्बे समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं। 

स्पीकर क्या होता है? What is Speaker -- in Hindi
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